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कलेक्टर के आदेश पर मोनू उर्फ महेन्द्र कोसरिया का जिला बदर, जिले में है कई मामले

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी हिमशिखर गुप्ता द्वारा पुलिस अधीक्षक महासमुंद के प्रतिवेदन के आधार पर सहमति व्यक्त करते हुए मोनू उर्फ महेन्द्र कोसरिया, पिता मंचराम कोसरिया, साकिन सतनामी पारा (चैलिक पारा) बसना, जिला महासमुंद को छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 5 (ख) के अंतर्गत अनावेदक के विरूद्ध वैधानिक कार्रवाई किया.

उसे महासमुंद जिला एवं सीमावती जिला के सीमाओं से निष्कासित (जिला बदर) किया गया है। पुलिस अधीक्षक के प्रतिवेदन के अनुसार अपराधों के संक्षिप्त ब्यौरा दिया गया है, जिसमें चोरी, गंदी-गंदी गालियां देना, जान से मारने की धमकी देना, धारदार हाथियार लेकर लहराते हुए मुहल्ले के लोगों को डराना, धमकाना, शासकीय अस्पताल में गंदी-गंदी गाली गलौच कर मारपीट करना, शासकीय कार्य में बाधा पहुंचा कर जान से मारने की धमकी देना आदि का अभ्यस्थ है। इसके अपराधिक कृत्य से आमजन भयभीत रहते है तथा इसके विरूद्ध थाने में रिपोर्ट नहीं करना चाहते है। इसके विरूद्ध थाना महासमुंद में अनेकों मामले पंजीबद्ध होकर न्यायालयों में चालान पेश किया गया है, जिसमें से कई मामले विचाराधीन है।

जिला दण्डाधिकारी द्वारा आदेश जारी कर अनावेदक को आदेश तिथि 15 अक्टूबर 2018 से लेकर 14 अक्टूबर 2019 तक की कालावधि के लिए महासमुंद, रायपुर, धमतरी, गरियाबंद, बलौदाबाजार, रायगढ़ जिले के सीमाओं से बाहर चला जाए तथा इस तिथि से निष्कासित होने का आदेश दिया गया है। अनावेदक को सूचना प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर आदेश का पालन करना आवश्यक है। जिला दण्डाधिकारी ने अनावेदक को निर्देशित किया है कि आदेश के प्रभावशीलता की अवधि में उपरोक्त वर्णित जिलों की सीमा के भीतर प्रवेश नहीं करेगा।



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