13 सीटों पर लटकी बीजेपी की तलवार, 4 विधायक भी शामिल.
बीजेपी ने कल किये अपने प्रेस कांफ्रेंस में कुल 77 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है. कुल 90 प्रत्याशियों में अब केवल 13 प्रत्याशियों के नाम आने रह गए है. इन 13 प्रत्याशियों में बीजेपी 4 ऐसे विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशीयों के नाम की घोषणा नहीं कर पाई जहाँ पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी जीते थे.
जिसमे रायगढ़ जिले के लैलूंगा, महासमुंद जिले से बसना, सरायपाली और राजधानी रायपुर से उत्तर की सीट. ये चारों सीट पिछले चुनाव में बीजेपी के कब्जे में थी मगर इस बार इन सीटों पर कहीं काटों की टक्कर है तो कहीं प्रबल दावेदारों की संख्या ज्यादा. ऐसे में शायद इन सीटों पर भाजपा को प्रत्याशी तय करने में ज्यादा विचार मंथन करना पड़ सकता है.
कांकेर
2013 के विधानसभा चुनाव को देखें तो कांग्रेस के शंकर ध्रुव ने भारतीय जनता पार्टी के संजय कोडोपी को करीब 5 हज़ार वोटों से मात दी थी.
बालोद
विधानसभा चुनावों के लिहाज से ये क्षेत्र इसलिए खास हो जाता है क्योंकि संजारी बालोद जिले की तीन विधानसभा सीटों पर पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को करारी हार मिली थी.
2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के भैयाराम सिन्हा ने बीजेपी के प्रीतम साहू को मात दी थी. उन्होंने प्रीतम साहू को करीब 30 हजार वोटों के अंतर से हराया था.
गुंडरदेही
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की गुंडरदेही सीट पर कांग्रेस का कब्जा है. सियासत की बात की जाए इस सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच हमेशा ही कड़ी टक्कर रही है. इस बार यहां का सियासी मिजाज बदला हुआ है.
गुंडरदेही सीट पर पिछले पांच चुनावों में हर बार नए चेहरे को जीत मिलती रही. 1993 में बीजेपी के ताराचंद, 1998 में कांग्रेस के घनाराम साहू, 2003 में बीजेपी की रमशीला साहू, 2008 में बीजेपी वीरेंद्र कुमार साहू और 2013 में राजेन्द्र कुमार राय विधायक बने थे.
डौंडीलोहारा
डौंडी लोहरा विधानसभा सीट पर पिछली बार कांग्रेस ने अपना परचम लहराया था. संजारी बालोद जिले की तीनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था.
ये सीट एसटी के लिए आरक्षित है, इस लिहाज से यहां मुकाबला कड़ा रहता है. 2013 के चुनाव में कांग्रेस के अनिला भेड़िया ने यहां बड़े अंतर से जीत हासिल की थी.
जैजैपुर
जैजैपुर विधानसभा बसपा का मजबूत गढ़ है. 2008 में परिसीमन के बाद वजूद में आई जैजैपुर राज्य की इकलौती सीट है जहां से बसपा के केशवचंद्र विधायक हैं.
लैलूंगा
रायगढ़ की इस लैलूंगा सीट पर 2013 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की सुनीति सत्यानंद राठिया ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने कांग्रेस के ह्रदय राम राठिया को करीब 15 हजार वोटों से हराया था.
पिछले कुछ चुनावों से इस सीट पर एक ट्रेंड देखने को मिला है. यहां एक बार बीजेपी जीतती है और दूसरी बार कांग्रेस जीत दर्ज करती है.
कोटा
ये ऐसी सीट है जहाँ पिछले 66 साल से कांग्रेस का कब्जा है. पिछले 14 विधानसभा चुनाव हुए कांग्रेस के सिवा किसी दूसरी पार्टी का खाता नहीं खुला है. दरअसल इस सीट पर पिछले तीन चुनाव से अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी चुनाव जीतती आ रही हैं. हालाकि कांग्रेस से बगावत कर अजीत जोगी ने जनता कांग्रेस नाम से अपनी अलग पार्टी बना ली है.
रामानुजगंज
छत्तीसगढ़-झारखंड बॉर्डर पर स्थित रामानुजगंज विधानसभा सीट पर इस बार सभी की नज़रें टिकी हैं. यहां अभी तक कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में कांटे का मुकाबला रहा है.
अंबिकापुर से कुछ ही दूर इस विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा दौर में कांग्रेस के बृहस्पत सिंह विधायक हैं, उन्होंने पिछले चुनावों में पूर्व विधायक और बीजेपी उम्मीदवार रामविचार नेताम को बड़े अंतर से मात दी थी.
प्रेमनगर
पिछले एक दशक से राज्य की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी के सामने अपने किले को बचाने की चुनौती है. छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले की प्रेमनगर विधानसभा सीट पर भी इस बार सभी की नजरें टिकी हैं.
प्रेमनगर विधानसभा सीट पर 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खेलसाई सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की रेणुका सिंह को भारी अंतर से मात दी थी. रेणुका सिंह इससे पहले 2003 और 2008 में इसी सीट से विधायक रह चुकी हैं.
रायपुर उत्तर
रायपुर शहर की रायपुर उत्तर विधानसभा सीट पर अभी तक एक बार कांग्रेस और एक बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है. यहां से भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्रीचंद सुंदरानी पार्टी के प्रवक्ता हैं और कई मौकों पर अपनी बात रखते आएं हैं.
2013 विधानसभा चुनाव में श्रीचंद सुंदरानी ने कांग्रेस के कुलदीप सिंह जुनेजा को करीब 4 हजार वोटों से मात दी थी.
महासमुंद
महासमुंद विधानसभा सीट पर हर बार लोग अपना नेता बदलते हैं. इस सीट की खास बात ये है कि यहां किसी एक पार्टी का वर्चस्व नहीं है. बल्कि 2013विधानसभा चुनाव में तो ये सीट निर्दलीय के हाथ लगी थी.
पिछले चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़े विमल चोपड़ा ने कांग्रेस के पूर्व विधायक अग्नि चंद्रकर को करीब 5000 वोटों से मात दीथी.
सरायपाली
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की सरायपाली विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. राज्य के गठन के बाद तीन बार हुए विधानसभा चुनाव में दो बार बीजेपी और एक बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है. मौजूदा समय में यहां से बीजेपी के रामलाल चौहान विधायक हैं, लेकिन कांग्रेस वापसी के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी है.
सरायपाली के सियासी समीकरण की बात की जाए तो इस सीट को लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. हालांकि बीते पंद्रह साल से इस सीट पर कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी के प्रत्याशी को जीत मिलती रही है.
बसना
महासमुंद जिले की बसना विधानसभा सीट अपने आप में काफी खास है. अभी तो ये सीट भारतीय जनता पार्टी के पास है, लेकिन बीजेपी के सामने भी मुश्किल इतिहास की है. 2013 में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी की रुपकुमारी चौधरी ने कांग्रेस के पूर्व विधायक देवेंद्र बहादुर सिंह को करीब 7000 वोटों से मात दी थी.