क्या बगावत के डर से नहीं तय हो पाया बसना विधानसभा में प्रत्याशी का नाम ?
छत्तीसगढ़ के जिस विधानसभा
क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी बारह सौ करोड़ रुपये के विकास कार्यों का दावा कर
रही है, उसी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी को यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि
वो अपना टिकट किसे दे ! बसना विधानसभा में प्रत्याशी की घोषणा करना बीजेपी के लिए
चुनौती बनता जा रहा है.
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक महिला प्रत्याशी के रूप में रूपकुमारी चौधरी
को बसना विधानसभा से अपना प्रत्याशी बनाया था जिन्होंने लगभग 7000 वोटों से
देवेन्द्र बहादुर को मात देने के बाद, बीते 5 वर्षों में बारह सौ करोड़ रूपये के
विकास कार्यों का दावा किया है.
यदि बीते पांच वर्षों में बारह सौ करोड़ रूपये के विकास कार्यों का दावा बीजेपी
करती है, तो प्रत्याशी को दुहराने से अलावा कोई दूसरा रास्ता तय करने में काफी
सोचना समझना पड़ेगा.
देखा जाए तो रूपकुमारी चौधरी सहित अन्य कई प्रबल दावेदार भी अपने आप को घोषणा से
पहले ही प्रत्याशी मान चुके है, ये सभी अपना-अपना टिकट कन्फर्म मानकर जल्द ही आगे चुनाव की तैयारी में जुटना चाहते
है, ख़बरों की माने तो कई दावेदार प्रत्याशी घोषणा के पहले ही अपने आप को प्रत्याशी
बताकर जश्न मनाने से साथ बधाइयाँ देने लगे थे. टिकिट घोषणा के पहले सभी लगातार किसी
ना किसी ने संपर्क बनाये हुए थे. लेकिन टिकट नहीं मिलने के कारण सभी शांत हो गए और
अगली आने वाले सूची में उनके नाम के आने का इंतज़ार कर रहे है.
पार्टी का टिकट तय नहीं कर पाना इस बात का संकेत हो सकता है कि पार्टी विधानसभा
चुनाव के समय बगावत नहीं चाहती, यदि इन दावेदारों में से किसी ने भी बगावत किया तो
पार्टी को बहोत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. ऐसे में पार्टी चाहेगी की जितना देर
हो सके तब तक प्रत्याशी का नाम अटकलों पे बचाए रखे ताकि यदि कोई बगावत करता है तो
उसे पार्टी से अलग होकर चुनाव की तैयारी करने में ज्यादा समय नहीं मिल पाए.
क्योंकि यदि ऐसा हुआ तो बीजेपी को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.