बीते 18 वर्षों में देखने मिल रहा अकाल का सबसे भारी प्रकोप, किसान मवेशियों के हवाले करने लगे है फसलें.
महासमुंद जिले के बसना,
सरायपाली में कृषि क्षेत्र के लोगों का प्रमुख व्यवसाय है, यहाँ के अधिकतर लोगों
की रोजी रोटी किसानी से ही चलती है. मगर खेती के चलते इस वर्ष यहाँ के बहोत से
किसानों को मायूशी मिल रही है. इस वर्ष बरसात के शुरुआती दिनों में जिस प्रकार
अच्छी बारिश हुई थी, उससे लगने लगा था कि कम से कम इस वर्ष धान की
फसल अच्छी होगी. लेकिन गणेश पूजा के समय से पानी नहीं गिरने के कारण किसानों की
सारी उम्मीदों पे पानी फिर गया.
देखा जाए तो इस वर्ष दो बार जोंक नदी के पुल के ऊपर से पानी गया है लेकिन यहाँ ऐसी
कोई व्यवस्था नहीं है जिससे कि वे इस पानी को एकत्रित कर उसे खेतों तक पहुँचाने के
काम आये.
अच्छी फसलों के लिए किसानों को केवल एक ही बारिश की दरकार थी. यहाँ के किसान आज भी
केवल बारिश के भरोषे ही फसलों का उत्पादन करते है. सरकार अब भी अकाल जैसी स्थिती से
निपटने के लिए किसानों को नहर से पानी जैसी ज़रूरत पूरी करने हेतु नाकाम है.
जो बड़े किसान है इस बार
वह भी बोर के सहारे भी अपनी फसलों को बचाने में नाकाम है. जल का स्तर इस वर्ष इतना
ज्यादा गिर चूका है कि बोर से पानी निकालना भी मुश्किल हो गया है.
क्षेत्र के तालाब भी इस वर्ष पूरी तरीके से नहीं भर पाए. अब तो तालाबों की हालत
ऐसी हो चुकी है मानों मार्च के महीने का होली आ गया हो.
रेमड़ा के किसान उग्रसेन साकरे ने बताया कि बीते 18 वर्षों में उनके क्षेत्र में
अकाल की ऐसी भयानक स्थिति देखने को मिल रही है. जिनके पास पानी का कोई साधन नहीं
है उन्होंने अपनी सारी उम्मीद छोड़ दी है.
वही धानापाली के किसानों ने बताया कि इस वर्ष उनके गाँव में 500 एकड़ में खेती की गई है लेकिन पानी के आभाव में केवल एक तिहाई हिस्सा ही बचा है और जो बचा है वह भी मरने की कागार पर है. साथ ही बताया की यह स्थिति ना केवल उनके गाँव बल्कि आस-पास से सभी गाँव पितायिपाली, भुल्का, सकरी, जगत, बारडोली, भैसखुरी, कोदोपाली, पलसापाली, ख्वासपाली, चिर्रचुआ और पठियापाली में भी है.
खेतों में सही समय पर पानी देने के लिए यहाँ के किसानों को बिजली भी नहीं मिल पा रही है. गांव के कई ऐसे किसान भी जिनकी फसल पानी के अभाव पूरी तरह नष्ट हो गई है, जिस कारण किसान अपने खेतों में जाना भी छोड़ दिए है और फसल को मवेशियों के हवाले कर दिए हैं.
किसानों ने बताया कि मौजूदा समय में हालात ऐसे बन गए है कि खर्च की गई रकम भी हाथ में आ जाएगी, खेती के लिए गये कर्ज अब कैसे चुकाएं इसकी चिंता भी उन्हें सता रही है. फसल बीमा के बारें में पूछे जाने पर बताया कि बीमा का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाता है. कई बार पटवारी की लापरवाही से अनावरी रिपोर्ट भी गलत बता दी जाती है जिसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है.