विधानसभा चुनाव में दो बार जीते तो दो बार हार चुके है ‘राजा साहब’.
फुलझर अंचल में लोगों के बीच ‘राजा साहब’ के नाम से मशहूर राजा देवेन्द्र
बहादुर सिंह को टिकट देने के लिए कांग्रेस में असमंजस सी स्थिति बनी हुई है. तो
वहीं राजा जी को अब तक प्रत्याशी नहीं बनाये जाने पर उषा पटेल के समर्थकों में अब
भी उम्मीद बरकरार है.
बसना विधानसभा से यदि 80 के दशक से देखा जाए तो कांग्रेस ने इस सीट पर राजा के
परिवार के अलावा किसी अन्य पर कभी भरोषा नहीं किया है. वही बीते 15 वर्षों से
सत्ता का सुख नहीं भोग पाने वाली कांग्रेस को इस बार कांग्रेस को एक-एक सीट पर
प्रत्याशी चयन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
80 के दशक से अब तक हुए कुल 8 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ से लड़ रहे राजा
परिवार के प्रत्याशियों को 3 बार हार का सामना करना पड़ा है.
यदि केवल ‘राजा साहब’ देवेन्द्र बहादुर की बात करें तो कांग्रेस ने इन्हें
लागातार चार बार बसना और सरायपाली विधानसभा से मौका दिया है. 2008 के पहले 1998 और
2003 का चुनाव ‘राजा साहब’ सरायपाली से लड़े है तो 2008 और 2013 का चुनाव बसना
विधानसभा से.
इसके साथ ही एक मौके पर 1995 के दौरान हुए उपचुनाव में भी राजा साहब को जीत मिली थी.
इतिहास पलट कर देखा जाए जो ‘राजा साहब’ को लागातार दूसरी बार कहीं की जनता ने भी मौका
नहीं दिया है. 2003 में सरायपाली और 2013 में बसना से इन्हें हार का सामना करना
पड़ा है.
हार के बाद इनपर निष्क्रियता के आरोप भी लगे है तो वही सक्रियता और जनसंपर्क आधार
पर उषा पटेल की दावेदारी की जा रही है.