क्या त्रिलोचन की अपील , दिलाएगी उन्हें जीत ? - CG Sandesh

क्या त्रिलोचन की अपील , दिलाएगी उन्हें जीत ?

चुनाव समर के दूसरे चरण का महारण अगर बसना विधानसभा में हो रहा है, कहा जाए तो गलत नही होगा.  जिस तरह का भीषण संघर्ष बसना की सीट को लेके सारी पार्टीयों को करना पड़ा, वो गौर करने के काबिल है.  जहां सारे प्रतिद्वंदियों मतदाताओं को प्रभावित करने और प्रतिद्वंदी पे मानसिक दबाव बनाने के लिए नामांकन में शक्ति प्रदर्शन से लेकर प्रचार की अत्याधुनीक साधनों तक का उपयोग कर रहे हैं. प्रचार की इसी कड़ी में त्रिलोचन नायक जो इस क्षेत्र से जिलापंचायत में भी प्रतिनिधित्व करते हैं, और काफी जमीनी नेता माने जाते हैं.  उनकी एक जनप्रिय वोट अपील, जो छत्तीसगढ़ी भाषा मे है,  वॉट्सऐप वायरल हो रही है, जिसे हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं.

“मैं त्रिलोचन नायक आप मन के बीच मे आज आए हों, जैसे सब दिन आंथौ, मैं राजनीति नई करो, मैं तो मोर भाई बहिनी, गांव जहुंरिया के सब, काका बोबा दाई ददा लइका मन के मन के बात, हक के बात ला उपर उठाथौ. मोर कोई कार्यकर्ता नही है,  मोर संग में घूमने वाला, मोर प्रचार करने वाला सब मोर परिवार के सदस्य हैं चाहे वो कोई गांव कोई उम्र के हों, मैं हर तुंहर बीच के आदमी हों ओकरे बर जाती पाती के भेद भाव ला नाइ जानो, गांव में जैसे काकी, दीदी नोनी-बाबू भाँचा भाई रहिथें, मैं भी तोहर बर उसने ही हों. मोर उद्देश्य गांव में भेद भाव करके लड़ाई झगड़ा करा के वोट मांगे के नही है, मोर उद्देश्य तो गांव के विकास हो, हमर तोहर गांव के सड़क, पुलिया ले के खेती बाड़ी के सुविधा तक के काम हो, अधिकारी मन ला हमन ला खुशामद करे बार झन लागे, अधिकारी मन हमर बुता ला बिना घुमाए करें.

मैं हर आप सबके आशीर्वाद ले तीन बार ले जिला पंचायत के सदस्य हों, लेकिन आप मन सब देखे भी हौ, और आप मन मोर क्षेत्र में जाके पूछ लौ आज तक मैं काकरो एक पैसा के दलाली ले हवों का. अरे यहां तो छोटे मोटे पद पा जा ले कई झन साइकल ले कार हो जाथें, मैं तो जब कछु नई रहें तब किसानी के पैसा में सफारी कार चढ़त रहें, अब छोटे कार में चढथौ वो भि मोर नही है, काबर की कमीशन मैं खाओ नही, और मोर क्षेत्र के जनता के सेवा में खेती बर समय मिले नही. मोर सोच है, हमर भई बहिनी लोक जन गांव के दीदी बहिनी भाई काका बाबा मन के सब काम जब किहिं तब होना चाहिए, तुम न कोई ला पूछ ली हो, आज भी आधा रात के कोई मोला उठाए बर आथे, की फोन करथे मैं उठ के मदद बार पहुच जाथों, एखर बर नही पहुँचों की, मोला पैसा मिलते थे,  कमीशन मिलते पता कर लौ आज तक त्रिलोचन कतक कमीशन खाइस की, कतक दलाली करिस है, अर्रे मैं एखर बर जाथों की, महुँ गांव के मैईनसे हों तकलीफ ला जनथो. बसना के पिथौरा के अतकिह पूंजी वाला मन कहत रिहिन की, ये लूँगीवाला, दाढ़ीवाला जेहर ठीक से हिंदी तक नही जाने तेला विधानसभा में बैठा के हमर क्षेत्र के बेज़्ज़ती काबर करवाबो !!  अरे आप मन बताओ लुंगी पहिरना,  की छत्तीसगढ़ी माटी के छत्तीसगढ़ी भाषा ला गोठियाना बेज़्ज़ती है का, अर्रे मोर लुंगी और दाढ़ी किसान के पहचान है, डोली खेत मे हमन सूट- बूट पहन के नही उतरन, और जब ये लुंगी दाढ़ी वाला किसान बड़े बड़े अधिकारी और शहरी नेता मन के आगे में जाथे न तो ओमन के पेंट ढीला कर देंथे !!

आप सब ले मोर अपील है, पार्टी हिसाब में बहोत झिन के ऊपर आप मन हर भरोसा कर चुके हो, ए दारी चाहे जोगी जी के ऊपर भरोसा करो या आप मन के भाई-बेटा त्रिलोचन नायक के ऊपर भरोसा करो और जीता के विधानसभा भेजो काबर की अगर मैं हर जीत के विधानसभा पहुँचियो तो आप मन समझो वहां मैं नही आप मन सब बैठिहो, वहां दलाल के बात नही किसान के बात होहि, गांव के बात होहि तोहर जीत हर, मोर जीत है, मोला वोट दी हो तो खाली मैं नही, आप मन जिथियो और मोला पूरा आशा और विश्वाश है, की आप मन दूसरा मन ला बहोत मौका दे हौ के दारी तोहर भाई बेटा त्रिलोचन ला मौका दी हो !!”

 

तोहर भाई-बेटा

त्रिलोचन नायक (लूँगीवाला, दाढ़ीवाला )



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