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स्टार प्रचारकों के कार्यक्रम में भीड़ का नहीं जुटा पाना, कहीं आने वाला समय बीजेपी के लिए ख़तरे की घंटी तो नहीं ?

भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में अपने चुनाव प्रचार के लिए स्टार प्रचारक को बना दिए है. लेकिन कौन से विधानसभा में कौन से मुद्दों पर बोलना है शायद इस बात से वो अंजान है. शायद इस विधानसभा में आने के पूर्व उन्होंने यहाँ की तैयारियां ठीक तरह से नहीं की थी. स्टार प्रचारकों द्वारा केवल औपचारिकता निभाना कहा जाए या अति आत्मविश्वास इस तरह की चुनावी सभा अगर भाजपा करती रहेगी तो जरुर पार्टी इससे ख़तरे में आ सकती है.

दरअसल बसना विधानसभा के पिथौरा नगर में आज बीजेपी की स्टार प्रचारक और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी चुनावी सभा ले रही थी. लेकिन उनकी बातें सुनकर ऐसा लगा जैसे वो कहीं और के मुद्दों पे चर्चा कर रही है.

उन्होंने कहा कि अमेठी से लगातार राहुल गांधी और गाँधी परिवार जीतता रहा है. लेकिन वहां के लोग आज भी रेल से वंछित है. गाँधी परिवार के सभी सदस्यों ने अमेठी में रेल सुविधा का वायदा किया परन्तु आज तक उसे पूरा करने में असफल रहे.

जबकि देखा जाए तो बसना विधानसभा में आकर किसी और जगह के लिए रेल की बात करना जले पे नमक छिड़के जैसा है क्योंकि बसना विधानसभा लगातार कई वर्षों से रेल की मांग कर रहा है, केन्द्र से लेकर राज्य तक बीजेपी की सरकार होने के बावजूद यहाँ से जनप्रतिनिधि यह सुविधा आम जनों तक मुहैया कराने में नाकाम रहे है. रेल की सुविधा के लिए ना केवल अमेठी जबकि बसना और सरायपाली दोनों विधानसभा तरस रहा है. यहाँ की आम जनता आज भी महंगे और अधिक समय लेकर सफर कर रहें है.

यहाँ के मुद्दे ना केवल रेल बल्कि पलायन, रोजगार के साथ गुणवक्ता युक्त शिक्षा, किसानों के लिए पानी की व्यवस्था है और भी अन्य कई प्रमुख समस्याएं है.

बीजेपी यहाँ के बुनियादी मुद्दे उठाने में तो नाकाम है इसके साथ की इनकी सभाओ भीड़ और कार्यकर्ता मौजूद रहने का आभाव भी है. टिकट घोषणा के पहले बीजेपी के नेताओं का जो जोश दिखाई पड़ रहा था वो कहीं ना कहीं कम होता दिखाई दे रहा है.

वहीँ यहाँ के लोगों को भी सोशल मिडिया के माध्यम से यह कहकर बुलाया जा रहा था कि टीवी स्टार स्मृति ईरानी बसना विधानसभा आ रहीं है. जबकि उन्हें टीव्ही में किरदार निभाए कई वर्ष बीत गए है. बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए छत्तीसगढ़ लोक नृत्य का सहारा लिया गया था. लेकिन कार्यकर्ताओं की व्यस्थता कहें या बड़े नेताओं की नाराजगी जो कि स्टार प्रचारक के कार्यक्रम में भीड़ इकट्टा करने में नाकाम रहें.

आपको बता दें कि टिकट नहीं मिलने से नाराजगी के चलते पहले ही पार्टी में रहे संपत अग्रवाल ने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने के ऐलान से पार्टी का सरदर्द बढ़ा है, ऐसे में जो अन्य और भी दावेदार थे उन्होंने निर्दलीय चुनाव तो नहीं लड़ा लेकिन वो या तो कहीं अकेले जाकर लोगों के बीच आ रहे है या तो बसना विधानसभा के केवल चुनिन्दा कार्यक्रमों में अपनी औपचारिकता दिखा रहें है.  

ज्ञात हो कि स्टार प्रचारकों की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री राजथान सिंह, केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सहित 40 बड़े नेता शामिल है.



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