माँ ने ऐसा क्या जुर्म किया जो 6 माह के बच्चे के साथ जाना पड़ा जेल
बसना/भगतदेवरी. एक महिला पटवारी द्वारा ऋण पुस्तिका बनाने, रिकार्ड दुरूस्ती के लिए किसान से चार हजार स्र्पए रिश्वत लेने के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार प्रजापति महासमुंद ने अलग-अलग धाराओं में नौ वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार स्र्पए अर्थदंड से दंडित किया है. अर्थदंड अदा करने में चूक करने पर नौ महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.
अभियोजन के अनुसार महासमुंद जिले के पिथौरा तहसील अंतर्गत पटवारी हल्का नंबर 47 भगतदेवरी में पदस्थ तत्कालीन पटवारी लता सक्सेना (31) पति धनेश कुमार सक्सेना निवासी नांदगांव (बेलसोंडा) ने किसान देवेंद्र नायक से ऋण पुस्तिका बनाने के लिए 22 मार्च 2017 के पहले चार हजार स्र्पए रिश्वत देने की मांग की थी । जिस पर किसान ने 22 मार्च 2017 को एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर में इसकी शिकायत की.
लोक सेवक पटवारी ने किया पद का दुरूपयोग
पटवारी के पद पर रहते हुए लोक सेवक लता सक्सेना द्वारा पद का दुरूपयोग करते हुए रिश्वत मांगे जाने की लिखित शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में किसान ने बताया था कि उनके पिता रामचंद्र नायक ने भगतदेवरी में तीन अलग-अलग जगह जमीन खरीदी है जिसका नामांतरण और पटवारी अभिलेख में दुरूस्ती के साथ ही ऋण पुस्तिका में इंद्राज करने के लिए पटवारी एक खसरा नंबर का 1500 रूपये के मान से 4500 रूपये कर रही है. बातचीत में चार हजार रूपये में काम कर देने का आश्वासन दी है.
एंटी करप्शन ब्यूरो ने किया रंगे हाथों गिरफ्तार
शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने प्रक्रिया पूरी करने के बाद 5 अप्रैल 2017 को पटवारी के भगतदेवरी स्थित आवास में छापामार कार्रवाई करते हुए योजनाबद्ध तरीके से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया. किसान से रिश्वत लेकर अपने टेबल में रखे हैंडबैग में चार हजार स्र्पये पटवारी द्वारा रखे गए नोट को जब्त कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13 (1) डी और सहपठित धारा 13(2) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर न्यायालय में एक नवंबर 2017 को पेश किया.
तेरह महीने में पूरी हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई तेरह महीने में पूरी करते हुए विशेष न्यायाधीश ने दोषसिद्ध पाए जाने पर अभियुक्ता लता सक्सेना को धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चार वर्ष के सश्रम कारावास और चार हजार स्र्पये अर्थदंड तथा धारा 13 (1) डी ,सहपठित धारा 13(2) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास और छह हजार स्र्पये अर्थदंड से दंडित किया है. दोनों सजाएं साथ-साथ चलेगी इस लिहाज से महिला पटवारी को पांच साल की कैद की सजा भुगतनी होगी.
मासूम बालक को भी जाना पड़ गया जेल
कहा जाता है कि मां-बाप के अच्छे-बुरे कर्मों का फल संतान को भोगना पड़ता है. इस मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ. देश-दुनिया से बेखबर महज छह महीने के दूधमुंहे बालक दीक्षांत को भी अपनी मां के साथ जेल जाना पड़ा. 30 नवंबर को देर शाम सजा सुनाए जाने पर महिला पटवारी रो पड़ी. सुनवाई के दौरान उपस्थित महिला पटवारी की सास बच्चे को साथ लेकर खुद भी जेल जाने और उसकी देखभाल करने की जिद करने लगी. जिसे विधिक सलाहकारों ने समझाइश दी.