एग्जिट पोल ने उड़ाई सभी पार्टियों की नींद
छत्तीसगढ़ में इस बार चुनाव परिणाम आने के पहले एग्जिट पोल में जिस तरह समीकरण बता रहें है उसमे लगभग सभी पार्टियों की नींद उड़ा रखी है. कई अलग-अलग संस्थान द्वारा बनाये गए इस एग्जिट पोल में कोई छतीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बनता बता रहा है तो कोई कांग्रेस की यहाँ तक की कुछ एग्जिट पोल ऐसे भी है जिसमे किसी एक पार्टी की सरकार बनती नजर नहीं आ रही है शायद यह एग्जिट पोल जोगी कांग्रेस के लोगों को अत्यंत भा रहा होगा. जिसे लेकर अब अजीत जोगी के किंग मेकर बनने की संभावना भी जताई जा रही है. मगर परिणाम में पारदर्शिता 11 दिसंबर को ही आयेगी जिसके बाद यह स्पष्ट हो जायेगा की कौन सम्हालेगा मुख्यमंत्री की गद्दी और कौन बनाएगा सरकार. फिलहाल बीजेपी की हालत इन एग्जिट पोल में खस्ता नजर आ रही है. 15 साल राज और विकास का दावा करने वाली बीजेपी अगर सभी एक्जिट पोल में बहुमत हासिल नहीं कर पाई तो यह उनके लिए चिंता का विषय है.
एक नज़र चैनलों के एग्जिट पोल पर -
INDIA TV-
BJP – 42-50
CONG. – 32-38
JCC+ - 06-08
Other - 01-03
Aaj tak –
CONG. – 55-65
BJP - 21-31
JCC+ - 04-08
My Pace –
CONG. -48
BJP -38
OTHER -06
Zee Media –
CONG. -44
BJP -40
JCC+ -02
OTHER -04
NDTV-
CONG - 42
BJP - 41
JCC+ - 04
OTHER - 03
ABP News-
BJP - 52
CONG. - 35
OTHER - 03
क्या होता है एग्जिट पोल?
इसका मतलब होता है कि जब मतदाता अपना
वोट डालकर निकल रहा हो तब उससे पूछा जाए कि उसने किसे वोट दिया. इस आधार पर किए गए
सर्वेक्षण से जो व्यापक नतीजे निकाले जाते हैं उन्हें ही एक्जिट पोल कहते हैं.
ओपिनियन पोल इससे सर्वथा भिन्न होते हैं. इस सर्वे में निर्वाचकों से पूछा जाता है
कि वे अपना मत किसे देने का मन बना रहे हैं.
पोल पर प्रतिबंध –
1999 में चुनाव आयोग ने ओपिनियन पोल और एक्जिट पोल को प्रतिबंधित कर था जिसके बाद एक समाचार पत्र ने आयोग के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. और फिर कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि आयोग के पास ऐसे ऑर्डर जारी करने की शक्ति नहीं है और किसी मसले पर सर्वदलीय सर्वसम्मति उसके खिलाफ कानूनी प्रतिबंध का आधार नहीं होती है.
हालांकि अब तब ओपिनियन पोल पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है लेकिन तलवार इस पर अब भी लटकी हुई है. शायद यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में चुनाव हो जाने के लगभग 2 हफ्ते बाद एग्जिट पोल दिखाया जा रहा है. ऐसा भी माना जाता है कि एक्जिट पोल में बढ़त लेनी वाली पार्टियों के पक्ष में मतदान किया जाता है जिसके चलते किसी अन्य पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है.