महासमुंद : नहीं थम रहा महुआ शराब का अवैध कारोबार, नए नियम से बढ़ने लगेगी बिक्री ! क्या मुखबिरों को शराब पकड़वाने पर मिलनी चाहिए प्रोत्साहन राशि ?
छत्तीसगढ़ में शराब खरीदी पर अब कोटा तय कर दिया गया है। नए नियम के तहत अब शराब हो या बीयर एक बार मे एक व्यक्ति को एक ही बोतल दी जाएगी । इस नियम को देखकर लगता है कि आबकारी विभाग राज्य में अवैध महुआ शराब की बिक्री को और अधिक प्रोत्साहित करना चाहती है। अगर विभाग चाहता की राज्य में अवैध शराब पर पाबंदी लगे तो विभाग को जमीनी स्तर पर और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है।
इस नियम से पीने वालों की संख्या में तो कोई कमी नही आएगी लेकिन जरूर अवैध शराब की बिक्री में इज़ाफ़ा होगा वह भी महुआ शराब की खरीदी पर ।
क्या ऐसे नियम जारी कर आबकारी विभाग राज्य में और अधिक महुआ शराब की बिक्री करने वालों को प्रोत्साहित करना चाहता है ? क्योंकि इसके पहले भी हमने देखा है कि कोरोना काल के समय जब शराब मिलना बंद हो गया तो लोगों ने महुआ शराब को नशा करने का नया जरिया बना लिया। और इसके बाद से ही गाँव-गाँव में महुआ शराब बनाने की प्रक्रिया में तेजी आई है। कई लोग प्रतिदिन 1 हजार से 2 हजार लीटर तक महुआ शराब बनाकर उसे बेच रहे हैं। इस ठिकानों पर बार-बार पुलिस की कार्यवाही होने पर भी अपराधी दुबारा जेल से छूटकर वहीं अवैध शराब बेचने लग जाते हैं।
जिले में आबकारी विभाग का हाल ऐसा है कि हजार शिकायत के बाद भी वह इन महुआ शराब बेचने वालों पर कड़ी कार्यवाही करती नजर नही आती। जबकि पुलिस अपने अन्य कामों में व्यस्त होकर भी प्रतिदिन छोटे मोटे अवैध शराब पर कार्यवाही कर परेशान है। अक्सर लोग सहायता के लिए पहले पुलिस के पास जाते हैं । क्योंकि आबकारी विभाग के कार्यालय लोगों की पहुंच से दूर है। ऐसे नियम जारी होने से अब पुलिस की मुश्किलें आने वाले समय में और भी बढ़ने वाली है।
आज अवैध शराब बेचने वाले माफियाओं की स्थिति ऐसी है कि कई बार शराब पकड़ने गई पुलिस पर ही ये कई तरह के बेबुनियाद आरोप लगा देते हैं।
हाल ही में अगर महासमुंद जिले की बात करें तो बसना थाना क्षेत्र के भंवरपुर चौकी पुलिस पर एक महिला ने जबरन घुसने का आरोप लगाया था। जबकि उस ठिकाने पर पुलिस ने पहले भी अवैध शराब जप्त की थी, और उक्त ठिकाने पर लगातार अवैध शराब मिलने की शिकायत है।
इतना ही नही, थोड़े से रकम के लिए क्षेत्र में कई मीडिया से जुड़े लोग भी इन अवैध शराब बेचने वालों को पुलिस से संरक्षण दिलाने का काम करते हैं। जिसके बाद इन शराब माफियाओं को क्षेत्र में अवैध शराब बेचने की खुली छूट मिल जाती है। सब कुछ मंथली पेमेंट के माध्यम से सेट कर लिया जाता है। और चंद रुपयों के लिए बर्बादी की कागार पर पहुंचने लगते हैं युवा। सुबह से लेकर शाम तक कमाए फिर सब शराब में उड़ाए। क्या ऐसे तरक्की करेगा छत्तीसगढ़ शराब के नशे में ... बिल्कुल नही ! अब जरुरत है तो छत्तीसगढ़ में शराबबंदी की ताकि संवर सके युवाओं का भविष्य, जो कमाई है उसका हो सके सदुपयोग घरों में महिलाओं के प्रति हिंसा रुक सके।
कुछ लोग शराब कोचियों को पकड़वाने के बदले उन्हें ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठने लगते है। और इसी काम को अपना जरिया बना लेते हैं। ऐसे में क्या अब मुखबिरों को शराब पकड़वाने पर प्रोत्साहन राशि दी जानी चाहिए ताकि इनका काम ब्लैकमेल करना नहीं बल्कि शराब पकड़वाना हो। जिससे महुआ शराब की बिक्री पर लगाम लग सके।