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महासमुंद : फिर से जाग उठा है हिन्दू भारत को स्वर्ग बनाएगा, इस बार तो 400 कमल खिलाएगा !

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सृष्टि सृजन का दिन, अर्थात आज के दिन ही ब्रम्हा ने इस सृष्टि की रचना की थी। इसलिए यह दिन हिन्दुओं के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। देश भर में इस दिन को कई अलग अलग तरीकों से मनाया जाता है। नवरात्रि, गुड़ी पड़वा, हिन्दू नववर्ष इत्यादि।

वैसे तो यह सारे पर्व निरंतर आदिकाल से चले आ रहे हैं, लेकिन भारत की आजादी के बाद इस पर्व को लोगों के अंदर मनाने का जो भाव इस बार दिखाई दे रहा है वह अत्यंत ही भव्य है। इस भाव को देखकर लगता है की हिन्दू अब जाग चूका है पुनः भारत को स्वर्ग बनाने के लिए।

आज देशभर में लोग इस पर्व को जोर शोर से मनाते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस भाजपा सभी लोग अपने अपने तरीके से इस पर्व की बधाई देते नजर आ रहे हैं। लेकिन कुछ कांग्रेस के नेता जब आज सोशल मीडिया में इस पर्व की बधाई दे रहे थे तो लोग उनसे कहने लगे की कांग्रेस सरकार के समय हिंदू नववर्ष इतने भव्य तरीके से नही मनाया जाता था, जो आज दिखाई दे रहा है। निश्चित ही पर्व के इस भव्य रूप को देख, कांग्रेस स्वयं को आंक चुकी होगी। अब बारी है तो बस परिणाम घोषणा की... क्योंकि लोगों ने मन तो पहले से ही बना रखा है।

आज जब सरायपाली कांग्रेस के एक नेता विश्वजीत बेहरा ने अपने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को सनातनी नववर्ष एवं नवरात्रि की बधाई दी तो एक यूजर ने उनसे कहा की एक बात दिल से बताना क्या कांग्रेस के समय हिंदू नववर्ष इतने भव्य पैमाने पर मनाया जाता था? जिसपर उन्होने जवाब देने की बजाय यह कह दिया " हिंदू नव वर्ष तथाकथित संघ के द्वारा दिया गया नाम है!हकीकत में ये संवत नव वर्ष सनातनी नव वर्ष है जो आदिकाल से सनातनी मानते आ रहे है!!"

उन्होंने आगे अपने एक जवाब में यह भी लिखा की " पुराणों के अनुसार किसी भी धर्म का नाम हिंदू नही है, इतिहास अनुसार सिंध नदी के ऊपर वाले हिस्से में जो भी रहते है वह सब हिंदू है, चाहे वह किसी भी धर्म का अनुवाए हो! हमारे धर्म का नाम सनातन है! जो वर्ग में बंटा हुआ है! ब्राम्हण,क्षत्रिय,वैश्य,शुद्र...।"

इतिहास तो उन्होंने बताया लेकिन आधा अधूरा जो पूर्ण रूप से सत्य प्रतीत नही होता, वह यह बताना भूल गए कि वर्ष 1526 में मुगलों ने जब यहाँ आकर यहाँ कि अस्मिता और संस्कृति को लूटने का प्रयास किया तो यहाँ केवल सनातन धर्म ही जीवंत था, सिंध नदी के ऊपर वाले हिस्से में सिर्फ सनातनी ही थे, जहां व्यापार और धोखे के माध्यम से मुग़ल आये और यहाँ की संस्कृति सभ्यता को नष्ट करने का प्रयास किया। कई भव्य मंदिरों, विश्वविद्यालयों को नष्ट किया गया। एक बार नही कई बार किया, बावजूद इसके आज भी यहाँ की वह अस्मिता और संस्कृति मौजूद है जो धीरे धीरे और भी मजबूत होती दिखाई दे रही है।

वजह साफ है, 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद से ही उन्होंने भारत की संस्कृति और सभ्यता को विश्व भर में पुनः जागृत कर फैलाने का जो काम किया उससे आज पूरा विश्व भारत की संस्कृति और सभ्यता को जानना चाहता है। क्योंकि यह संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम की संस्कृति है। यह ना केवल सिंधु नदी के ऊपर बल्कि समस्त संसार को एक परिवार मानती है।

आजादी के 70 वर्षों बाद तक कांग्रेस ने नही किया वह भाजपा कर रही है। भाजपा के कार्यकाल में ना केवल एक राम मंदिर बल्कि कई अन्य प्राचीन मंदिर भी अपना भव्य रूप ले रहे हैं। इन मंदिरों के चलते ना केवल हिंदू बल्कि कई मुश्लिम भी अपना जीवन यापन कर रहें हैं।

लेकिन आज भी कांग्रेस के कई नेता इस संस्कृति और सभ्यता को नही स्वीकार कर पा रहे हैं।

महासमुंद लोकसभा की बात करें तो जहाँ बीजेपी प्रत्याशी रुपकुमारी चौधरी ने आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की शुरुआत चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष की बधाई देते हुए की, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी ताम्रध्वज साहू ने अपने सोशल मीडिया में जनसम्पर्क की कई तस्वीरें तो पोस्ट की लेकिन यह आर्टिकल लिखे जाने तक हमें उनके पेज में एक भी ऐसा पोस्ट नही दिखा जिसमे वे हिंदू नववर्ष की बधाई दे रहे हों। और यही फर्क राहुल गाँधी और मोदी में भी दिखाई दे रहा है। और कांग्रेस की यही बात अब लोगों को पसंद नही आ रही है।

कांग्रेस आज भी सामाज को बाँटाने का वह खेल खेल रही है जिसे लोग पसंद नही कर रहे हैं। कांग्रेस नेता विश्वजीत बेहरा अपने एक अन्य पोस्ट में लोगों को यह बता रहे हैं कि सरायपाली, बसना क्षेत्र के ओड़िया समाज, भाजपा से है, खासा नाराज,देंगे करारा जवाब! "

जबकि इस समाज के कई लोग उन्हें जवाब देते हुए यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि इस बार वे अपना वोट बीजेपी को ही देंगे।


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