इनकाउंटर में मारे गये 29 नक्सलियों में से 9 नक्सलियों की हुई... - CG Sandesh

इनकाउंटर में मारे गये 29 नक्सलियों में से 9 नक्सलियों की हुई पहचान...जानिये क्या हैं उनके नाम, कितने थे ये खूंखार

 कांकेर। कांकेर जिले के छोटेबेठिया पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिनागुंडा गांव के करीब मंगलवार को सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गये 29 नक्सलियों में 9 की पहचान हो गयी है। बाकी के 20 नक्सलियों की पहचान की जा रही है। आपको बता दें कि कांकेर में 15 महिला माओवादियों सहित कुल 29 माओवादी मारे गए थे। इस घटना में 3 जवान घायल हुए हैं। मुठभेड़ में मारे गए अन्य माओवादियों की पहचान की जा रही है। बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने बताया कि मुठभेड़ के बाद मंगलवार को 2 माओवादियों की पहचान की गई थी, लेकिन आज शाम तक 7 और माओवादियों की पहचान कर ली गई है।

जिनकी पहचान की गई है उनमें डिवीजनल कमेटी सदस्य शंकर राव और ललिता, उत्तर बस्तर डिवीजन की सदस्य माधवी, रमशीला और रंजीता, परतापुर एरिया कमेटी की सदस्य जुगनी, सुखलाल और श्रीकांत तथा मेढ़की एलओएस कमांडर रूपी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ में मारे गए अन्य माओवादियों की पहचान की जा रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षाबलों ने घटनास्थल से एक AK-47 रायफल, दो इंसास राइफल, एक SLR राइफल, एक कार्बाइन, तीन .303 राइफल, दो 315 बोर बंदूक, दो नौ एमएम पिस्तौल, दो देसी लांचर, आठ भरमार बंदूक, एक देसी हथगोला सहित भारी मात्रा में गोला बारूद और अन्य सामान बरामद किया है


इन नक्सलियों की हुई पहचान

कांकेर एसपी ने 9 माओवादियों के पहचान की पुष्टि कर दी है।

  1. शंकर राव- डीव्हीसी सदस्य उत्तर बस्तर डिवीजन मास प्रभारी।
  2. ललिता डीव्हीसी- सदस्य/परतापुर एरिया कमेटी प्रभारी/जनताना सरकार समन्वयक प्रभारी।
  3. माधवी- उत्तर बस्तर डिवीजन।
  4. जुगनी उर्फ मालती- परतापुर एरिया कमेटी।
  5. सुखलाल- परतापुर एरिया कमेटी।
  6. श्रीकांत- परतापुर एरिया कमेटी।
  7. रूपी- मेढ़की एलओएस कमाण्डर।
  8. रामशिला- उत्तर बस्तर डिवीजन।
  9. रंजीता पति शंकर राव- उत्तरबस्तरडिवीजन



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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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