Ajab-Gajab : पति की मौत के बाद अनुकंपा नौकरी मांगने पहुंच गई... - CG Sandesh

Ajab-Gajab : पति की मौत के बाद अनुकंपा नौकरी मांगने पहुंच गईं 3 पत्नियां, अफसरों के भी चकराए सर, जाने पूरा मामला…

झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी से एक अजब-गजब मामला सामने आया है. यहां सिंचाई विभाग में एक कर्मचारी की मौत के बाद अनुकंपा नौकरी मांगने तीन पत्नियां पहुंच गईं. एक नौकरी पर 3 पत्नियों के दावे से विभाग के अधिकारी भी चकरा गए हैं.

तीनों ही खुद को सिंचाई विभाग के कर्मचारी की पहली पत्नी ठहरा रही हैं और नौकरी देने की मांग कर रही हैं. इतना ही नहीं, तीनों महिलाओं ने कर्मचारी के साथ शादी संबंधी दस्तावेज भी पेश किए हैं. अधिशासी अभियंता पंकज सिंह का कहना है कि मामले की छानबीन कराई जा रही है.

दरअसल, पूरा मामला सिंचाई विभाग के माताटीला खंड का है. यहां सिंचाई खंड में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर तैनात संतोष कुमार की कैंसर की वजह से 6 फरवरी को मौत हो गई थी. पति की मौत के बाद उनकी जगह नौकरी की मांग लेकर तालबेहट निवासी क्रांति वंशकार पहुंचीं.



क्रांति वंशकार ने संतोष के मृत्यु प्रमाण पत्र समेत वारिसयान समेत अन्य दस्तावेज अफसरों को सौंपे. उसके कुछ दिन बाद भोपाल की रहने वाली सुनीता वर्मा भी कार्यालय आ धमक पड़ी. सुनीता ने भी खुद को संतोष की पत्नी बताया और नौकरी देने की गुहार लगाई. अफसरों ने जब कागजात मांगे तब सुनीता ने भी शादी के कार्ड, फोटो व अन्य दस्तावेज सौंप दिए.

बताया जा रहा है कि दोनों महिलाओं के कागजात देख अफसरों के होश उड़ गए. इधर, पहले पहुंची दो महिलाओं के कागजातों की छानबीन चल ही रही थी. उधर, इसी बीच तालबेहट की रहने वाली राजो भी माताटीला कार्यालय आ पहुंची. राजो ने भी खुद को संतोष की पत्नी बताया और अब वे नौकरी पाने का दावा कर रही हैं कि उन्हें पति की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति मिलनी चाहिए.

फिलहाल मामला सिंचाई विभाग के अफसरों के लिए बड़ा पेंचीदा हो गया है. एक कर्मचारी के तीन पत्नियां होने के दावे से सरकारी मुलाजिम के सिर चकरा गए हैं. हालांकि अफसर मामले की छानबीन में जुटे हुए हैं.



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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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