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छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच चल रहे महानदी के जल विवाद के अहम फैसले आयेंगे 15 दिसम्बर को

महानदी के पानी को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा सरकार के बीच चल रहे विवाद पर 15 दिसंबर को ट्रिब्यूनल से अहम फैसला आने की संभावना है. ओडिशा सरकार की कोशिश छत्तीसगढ़ के निर्माणाधीन सिंचाई प्रोजेक्ट पर स्थगन लेने की है.

सुप्रीम कोर्ट ने ही दोनों राज्यों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए ट्रिब्यूनल गठित कर दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक्टिंग जज के अलावा पटना और दिल्ली हाईकोर्ट के जज भी सदस्य हैं. सरकार गठन के बाद मंत्रिमंडल, विभागों में अफसरों के प्रभार बदलेंगे. ऐसे में अब तक जिन अफसरों द्वारा महानदी जल विवाद को देख रहे थे. उनकी जगह नए अफसरों के आने से ही उन्हें मामले को समझने और ओडिशा सरकार के इरादे का पता लगाने में ही समय लग जाएगा. ऐसे में ट्रिब्यूनल के सामने छग सरकार कमजोर पड़ सकती है. पिछले कई सालों से चल रहे महानदी के पानी को लेकर विवाद में 15 दिसंबर को अहम फैसले आने की पूरी संभावना है.

गैर बरसाती पानी को लेकर है ओडिशा सरकार की आपत्ति 

महानदी हर साल सैकड़ों मिलियन क्यूबिक मीटर पानी छत्तीसगढ़ से बहाकर ओडिशा ले जाती है. बारिश के दौरान तो पानी को लेकर कोई दिक्कत नहीं है. ओडिशा सरकार की आपत्ति गैर बरसाती सीजन के पानी को लेकर है. वे प्रदेश के सिंचाई प्रोजेक्ट को रोककर बारह माह इस नदी से पूरा पानी चाहते हैं. इन प्रोजेक्ट को लेकर आपत्ति राज्य शासन ने सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए महानदी में छः जगहों पर बैराज का निर्माण शुरू कर दिया है. इसमें रायगढ़ जिले में दो कलमा और साराडीह, मिरौनी, बसंतपुर, शिवरीनारायण और सामोदा बैराज शामिल हैं. अधिकांश का काम पूरा भी हो चुका है. ओडिशा सरकार प्रदेश के इन सिंचाई प्रोजेक्ट को रोकने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है.



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