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महासमुंद : शिशुपाल पर्वत पिकनिक स्पॉट और ट्रैकिंग पॉइंट में पेड़ काटने और कूड़ा कचरा फैलाने पर प्रतिबंध

महासमुंद। जिले के सरायपाली विधानसभा अंतर्गत आने वाले शिशुपाल पर्वत (बूढ़ा डोंगर) पिकनिक स्पॉट और ट्रैकिंग पॉइंट में सैर करने वालों के लिए कुछ नियम शर्ते लागू कर दिए गए है।

शिशुपाल पर्वत के प्रमुख द्वार पर अब वन विभाग के आदेशानुसार गठित समिति ने बेरियर बनाकर पर्वत में चढ़ने वाले प्रति व्यक्ति पर 20 रुपए शुल्क लिये जाने का प्रावधान किया गया है। अब हर रोज सुबह से यहां समिति के सुरक्षा गार्ड मौजूद रहा करेंगे। इसके अलावा शिशुपाल पर्वत के नीचे या ऊपर प्लास्टिक का उपयोग करने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा अब शिशुपाल पर्वत पर मदिरा पान करना पूर्ण वर्जित कर दिया गया है।

इससे पहले ऊपर पहाड़ में ही शराब सेवन करते लोग अक्सर नजर आते थे। लेकिन अब बिना अनुमति के पर्वत के ऊपर टेंट लगाना भी वर्जित है। वन विभाग ने अब शिशुपाल पर्वत पर आग लगाने से लेकर पेड़ काटने और कूड़ा कचड़ा फ़ैलाने को पूर्ण प्रतिबंध कर दिया है। वन विभाग का मानना है कि यह जैव विविधता से पूर्ण एक दर्शनीय स्थल है।

वन विभाग के आदेशानुसार गठित समिति ने बेरियर बनाकर, पर्वत में चढ़ने वाले प्रति व्यक्ति पर 20 रु शुल्क लिये जाने का प्रावधान किया है। नियम तोड़ने पर 15 हजार तक की जुर्माना और एक साल तक की जेल हो सकती है। वन विभाग ने पहली बार ऐसे कड़ा नियम बनाया है जिसमे पर्वत और वन संरक्षण को लेकर बनाए गए हैं।



गौरतलब है कि शिशुपाल पर्वत की ऊंचाई जमीन तल से हजारों फीट ऊपर है। यह वर्तमान में एक पिकनिक स्पॉट है, जो कई किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। कहा जाता है कि यह पहले राजाओं और सैनिकों के लिए एक अभेद किला था और इस किले में शस्त्र लेकर गुजरने वाले सैनिकों के लिए गुप्त सुरंगे थी।

बताया जाता है कि अंग्रेजों के आक्रमण के बाद यहां के अंतिम राजा शिशुपाल और सैनिकों ने अंग्रेजों के साथ भयंकर युध्द किया और आखिर में राजा शिशुपाल मारे गए। युद्ध में अंतिम राजा के मारे जाने के बाद 7 रानियों ने मर्यादा की रक्षा के लिए 1 हजार फीट की चोटी से घोड़ों पर बैठकर छलांग लगा दी, इसीलिए इसका नाम घोड़ा धार पड़ा ।

यहां एक प्राचीन शिव मंदिर हैं। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर के बाहर आज भी मकर संक्रांति के अवसर पर विशाल मेला लगता है। हज़ारों की संख्या में श्रृद्धालु यहां आते हैं। कहते हैं कि इस सूर्यमुखी मंदिर में पहले हनुमान सिक्का जड़ा हुआ था। जिसे बहुत शक्तिशाली और प्रभावशाली माना जाता था। लेकिन अब यह सिक्का यहां से गायब है।

यहां एक बहुत लंबी सुरंग है। हालांकि, नदी की रेत ने अब इस सुरंग का मार्ग अवरुद्ध कर दिया है लेकिन स्थानीय निवासी बताते हैं कि सुरंग के भीतर अब भी राजा के अस्त्र-शस्त्र पड़े हुए हैं।

इस पर्वत के ईर्द-गिर्द बहुत सी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां देखी जा सकती हैं। शतावर और अश्वगंधा खासकर यहां बहुत अच्छी मात्रा में हैंं। शिशुपाल पर्वत को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किए जाने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि पहले से भी यहां पर्यटक आते रहे हैं। लेकिन आगे सुविधाएं और बेहतर होंगी। यदि आप भी शिशुपाल पर्वत की ट्रिप प्लान करते हैं तो आप छत्तीसगढ़ के महासमुंद रेलवे स्टेशन पर उतर सकते हैं। या फिर विवेकानंद हवाई अड्डे, रायपुर तक आने के बाद कैब से आगे का सफऱ कर सकते हैं।




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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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