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महासमुंद : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 3000 सहायक शिक्षकों की नौकरी पर खतरा, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को एक बड़ा झटका लगा है सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के 3000 सहायक शिक्षकों की नौकरी संकट में आ गई है. इस फैसले के बाद शिक्षकों की निगाहें अब राज्य सरकार की ओर टिकी हुई है, मुख्यमंत्री के नाम उन्होंने ज्ञापन देकर अपनी मांग रखी है. .

शिक्षकों का कहना है कि फॉर्म भरते समय बी.एड की डिग्री मांगी गयी थी जॉइनिंग के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्णय आने से सभी नव नियुक्त शिक्षकों को नौकरी जाने का संकट है. बड़ी मात्रा मे शिक्षक विहीन स्कूलों मे भर्ती हुई थी. विगत वर्ष से बस्तर और सरगुजा संभाग के सुदूर वनांचल क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे महासमुंद के करीब 40 से 50 शिक्षकों को नौकरी जाने के डर सता रहा है. जिसे लेकर शिक्षकों ने संबंधित ज्ञापन महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा को मुख्यमंत्री के नाम सौंपा है.

विधायक द्वारा शिक्षकों को विभागीय डी.एड. करा कर, अध्यादेश लाकर या समान ग्रेड-पे मे मिडिल स्कूल या हॉस्टल वार्डन के पद मे समायोजन करने की बात कही गई है.

दरअसल छत्तीसगढ़ राज्य में शिक्षा विभाग में 2023 में 12489 पदों का विज्ञापन जारी किया था, जिसमें से 6285 पद सहायक शिक्षक के थे. सहायक शिक्षक की योग्यता को लेकर छत्तीसगढ़ में मामला लंबित था छत्तीसगढ़ राज्य में सहायक शिक्षकों की पदों पर भी बा डिग्री धारकों को शर्तों के आधार पर नियुक्तियां दे दी गई थी.

इसके बाद 2 अप्रैल 2024 को हाईकोर्ट में बीएड डिग्री धारकों को सहायक शिक्षक पद के लिए अमान्य मानते हुए शिक्षा विभाग को आदेश जारी कर कहा कि 42 दिनों के अंदर पुनरीक्षित सूची जारी कर ब्लड डिप्लोमा धारकों को नियुक्तियां दे दी जाए. वहीं हाई कोर्ट के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ राज्य और बा डिग्री धारकों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख करते हुए याचीकेदार की थी 28 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर राज्य सरकार की दो एसएलपी और बा डिग्री धारकों की 6 एसएलपी को खारिज कर दिया. वही 4 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने एक आर्डर कॉपी जारी की है जिसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को सही माना है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन ने 4 सितंबर 2023 को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को बेड उम्मीदवारों की योग्यता को प्राइमरी के लिए वैध माना और इसके लिए सभी राज्यों को सूचनार्थ जारी कर दी गई थी बावजूद इसके छत्तीसगढ़ में नियुक्तियां दी गई जो की पूरी तरीके से अवैध है.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी आठएसएलपी को खारिज करते हुए राज्य शासन को यह आदेशित किया है कि जल्द से जल्द डीएलएड डिप्लोमा धारकों को सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति आदि जाएं.

इसके बाद छत्तीसगढ़ के 3000 सहायक शिक्षकों की नौकरी संकट में आ गई है, यानी कि उनकी नौकरी जा भी सकती है. लेकिन राज्य सरकार का फैसला आना बाकी है.

शिक्षकों ने बताया की हम विगत लगभग एक वर्ष से बस्तर और सरगुजा संभाग के सुदूर वनांचल क्षेत्र में अपनी सेवाय दे रहे है, तथा चुनाव कार्य एवं साक्षर भारत जैसे विभिन्न कार्यक्रमों मे संलग्न है.

एकाएक उनको सेवा से निकालने से उनका जीवन यापन का संकट मंडरा रहा है. बहुत से लोगो की सरकारी नौकरी की उम्र चली गयी है एवं बहुत लोग ने अपनी नियमित नौकरी छोड़ कर सहायक शिक्षक के पद मे नियुक्ति ली है. कईयो की शादी भी टूटने का कगार पर है,  इस नौकरी के भरोसे कई लोगो ने बैंक से लोन लेकर रखा है, साथ ही बीच सत्र मे इस तरह के निर्णय से शिक्षा एवं प्रशानिक व्यवस्था चरमरा जायेगी कहा गया.


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