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बसना : 70 गाय रखने की व्यवस्था नहीं जुटा पाया नगर पंचायत ! गौवंशों के न्याय के लिए प्रदीप ठाकुर मुख्यमंत्री से करेंगे गौशाला निर्माण करने की मांग.

नगर पंचायत बसना के सीमओ ने सोशल मीडिया में चल रहे 400 गौवंशों के मुद्दे को लेकर आज के एक अख़बार में अपना पक्ष रखा है. जिसमे उन्होंने यह बात स्वीकार किया है की संसाधन के आभाव में नगर पंचायत बसना द्वारा गौवंशों को काऊ कैचर वाहन से दूरस्थ स्थान छोड़ा जाता है, जहाँ से वह फिर वापस लौटकर नगर में आ जाते थे. सीमओ ने बताया है कि नगर पंचायत बसना द्वारा 400 नहीं बल्कि करीब 70-80 गाय ही सड़कों से उठाया गया. नगर पंचायत द्वारा हर बार इन्ही 70-80 गाय को सड़क से उठाकर बहार दूरस्थ स्थान छोड़ा जाता था, जिसकी वजह से यह संख्या 400 हो गई और इन गायों को आज भी नगर में देखा जा सकता है.

जबकि इसके ठीक विपरीत शासन के निर्देशानुसार सड़कों के गाय उठाकर उनके लिए समुचित चारा पानी की व्यवस्था कर सुरक्षित स्थान पर रखा जाना था. शासन के निर्देशानुसार गाय को उठाने के बाद उसे किस गाड़ी से उठाया गया, कहाँ ले जाया गया यह सब जानकारी एकत्रित कर रखना था. लेकिन नगर पंचायत उन गायों को एक सुरक्षित स्थान देने के बजाय बार-बार एक ही कार्य को दुहराता रहा. संसाधन का आभाव कहने से नगर पंचायत बसना के पास 70 गाय रखकर चारा पानी उपलब्ध कराने तक की व्यवस्था नहीं थी और आने वाले समय में यह कार्य निरंतर दुहराया जायेगा.

वहीं इस मुद्दे को सुचना के अधिकतर के तहत जानकारी प्राप्त कर सोशल मीडिया में उपलोड करने वाले प्रदीप ठाकुर का कहना है कि नगर पंचायत बसना क्षेत्र में केवल कुछ ही बीमार गाय दिख रही हैं. जितनी संख्या में नगर में गायें मौजूद रहती थी आज उनकी संख्या में कहीं ज्यादा कमी दिखाई दे रही है. यदि नगर पंचायत बसना द्वारा छोड़े गए सभी गाय लौट आये हैं तो आज क्यों कुछ बछड़ो की स्थिति अपनी माँ के बिना बिगड़ रही है.  वहीं  आज एक बिछड़े की मौत हो गई है।

प्रदीप ठाकुर ने बताया कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी पर कार्रवाही होने से समाप्त नहीं होती बल्कि वे गौवंशों के लिए न्याय चाहते है ताकि आगे चलकर ऐसी स्थिति ना आये, सभी गाय एक स्थान पर सुरक्षित रहे जिसके लिए वे मुख्यमंत्री से बसना में गौशाला खोलने की मांग करेंगे.

उन्होंने कहा कि यदि संसाधन की कमी थी तो शासन के इस आदेश के बाद गोवंशों के साथ अन्याय हुआ है,  आदेश के बाद सड़कों से गाय तो उठा ली गई लेकिन उन्हें जिस हाल में रखना था उसका पालन नहीं किया गया. माता कही जाने वाली गाय को किसानों ने खेतों, पशुपालकों ने अपने घर तथा नगर पंचायत द्वारा सड़कों से इन गाय को भगा देने पर गाय बेघर हो गई. माता कही जाने वाली गाय का कहीं भी कोई स्थान नही रह गया. छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व कार्यकाल में बने गौठान भी भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गए और गोवंशों के लिए लाई गई यह योजना विफल रही. ऐसे में गाय जाए तो जाए कहाँ ? जिनके न्याय के लिए बसना नगर में एक गौशाला का निर्माण होना चाहिए.


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