गुणवत्ता और उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नैक... - CG Sandesh

गुणवत्ता और उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नैक आवश्यक - डॉ अनुसुइया

प्राचार्य प्रो डॉ अनुसुइया अग्रवाल डी लिट के निर्देशन में स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम आदर्श महाविद्यालय में आईक्यूएसी के तहत नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य महोदय ने सरस्वती माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं द्वीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तत्पश्चात कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित प्रमुख वक्ता श्री अरविंद साहू विभागाध्यक्ष अंग्रेजी शास. माता कर्मा कन्या महाविधालय एवं डॉ. मनोज कुमार शर्मा विभागाध्यक्ष वाणिज्य शास. माता कर्मा कन्या महाविधालय का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंटकर किया गया। स्वागत उदबोधन में प्राचार्य प्रो डॉ अनुसुइया अग्रवाल ने कहा कि हमारे देश के उच्च शिक्षा संस्थान पीढ़ी के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए नित नए नए मानदंड स्थापित कर रहे हैं। मूल्यांकन के बिना शिक्षा अधूरी है, चाहे वह शिक्षकों का हो, महाविधालय का हो या विश्वविद्यालय का। नैक अपने अंतर्गत सूचीबद्ध विश्वविद्यालयों का समग्र मूल्यांकन करती है। यह निर्धारित करने के लिए मानक निर्धारित करता है कि संस्थान भारतीय उच्च शिक्षा मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।

तत्पश्चात कार्यक्रम के प्रथम विषय विशेषज्ञ श्री अरविंद साहू सर ने नैक क्या क्यों और कैसे विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।


उन्होंने बताया कि नैक मान्यता की एक मजबूत प्रणाली के साथ, हम पारदर्शिता, मेंटरशिप कार्यक्रम और सुधार की गुंजाइश को सुविधाजनक बना सकते हैं। नैक उच्च शिक्षा संस्थानों में दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता की पुष्टि करता है। नैक मान्यता छात्रों के संपूर्ण विकास में सहायता करने के लिए शैक्षणिक कार्यक्रमों और सीखने के परिणामों को निर्धारित करती है। नैक मान्यता प्रदान करने का एक उद्देश्य है, यानी संस्थानों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखना। इसके अलावा, नैक संघीय या राज्य प्राधिकरणों द्वारा समर्थित कार्यक्रमों को वित्तपोषित करने की सुविधा प्रदान करता है। नैक मान्यता प्राप्त होने के बाद इसकी वैधता अगले 5 वर्षों के लिए रहती है। इन 5 वर्षों के दौरान, कॉलेज सुधार के नए अवसरों की तलाश के लिए अपनी ताकत, कमजोरियों, अवसरों और खतरों पर काम करते हैं। संस्थान संसाधनों के आवंटन और विकास के लिए योजना बनाने पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर देते हैं। चूंकि यह उपाधि अल्प अवधि के लिए दी जाती है और इसे खोने या बेहतर ग्रेड प्राप्त करने का जोखिम हमेशा बना रहता है, इसलिए संस्थान दीर्घावधि में अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए सफलता की नई दिशा तलाशते हैं। तकनीक-सक्षम दुनिया में, शिक्षा प्रदान करने के स्मार्ट और प्रभावी मॉडल सबसे अच्छा तरीका हो सकते हैं।
                                                                                                                                                                 
द्वितीय सत्र में विषय विशेषज्ञ डॉ मनोज कुमार शर्मा सर ने सतत विकास लक्ष्यों और उच्च शिक्षा संस्थानों में उनके कार्यान्वयन पर अंतर्दृष्टि साझा करते हुए  नैक क्राइटेरिया को बिंदुवार चर्चा कर विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान किए। अपने उद्बोधन में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद का प्रस्ताव है कि सभी मान्यता प्राप्त संस्थानों को गुणवत्ता संधारण उपाय के रूप में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) स्थापित करना चाहिए। चूंकि, गुणवत्ता वृद्धि एक सतत प्रक्रिया है; आईक्यूएसी संस्थान की प्रणाली का एक हिस्सा है और गुणवत्ता संवर्द्धन और संधारण के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में काम करता है। 

आईक्यूएसी का मुख्य कार्य संस्थानों के समग्र प्रदर्शन में सचेत, सुसंगत और उत्प्रेरक सुधार के लिए एक प्रणाली विकसित करना है। उच्च शिक्षा में आत्म-मूल्यांकन, जवाबदेही, स्वायत्तता और नवाचारों को प्रोत्साहित करना, उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षण-अधिगम और अनुसंधान की गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक वातावरण को प्रोत्साहित करना, उच्च शिक्षा संस्थानों या उनकी इकाइयों, या विशिष्ट शैक्षणिक कार्यक्रमों या परियोजनाओं के आवधिक मूल्यांकन और मान्यता की व्यवस्था करना, गुणवत्ता से संबंधित अनुसंधान अध्ययन, परामर्श और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना और गुणवत्ता मूल्यांकन, संवर्धन और संधारण के लिए उच्च शिक्षा के अन्य हितधारकों के साथ सहयोग करना। आगे उन्होंने नेक और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पारस्परिक महत्त्व को साझा करते हुए बतलाया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 उच्च शिक्षा की गतिशील प्रकृति को रेखांकित करती है, समाज की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए संस्थानों को अपने शिक्षण और शोध के तरीकों में निरंतर विकास करने की आवश्यकता पर बल देती है। यह एक ऐसे शैक्षणिक पाठ्यक्रम की वकालत करता है जो शिक्षा की विकसित होती प्रकृति को अपनाता है, छात्रों और विद्वानों दोनों को एक ऐसी सीखने की प्रक्रिया बनाने के लिए सशक्त बनाता है जो व्यावहारिक, प्रभावी और प्रभावशाली हो। उन्होंने कार्बन क्रेडिट के साथ-साथ एसडीजी पर भी ध्यान केंद्रित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। शैक्षिक संस्थानों के भीतर सामाजिक जिम्मेदारी की भावना पैदा करने के लिए, कार्बन क्रेडिट जैसे विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार सामने रखें।

महाविधालय आइक्यूएसी प्रभारी तरुण बांधे ने नैक द्वारा अपनाए जाने वाले नए बाइनरी मान्यता दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप है, जिसमें बाइनरी सिस्टम (मान्यता प्राप्त या गैर-मान्यता प्राप्त) और परिपक्वता-आधारित ग्रेडेड मान्यता (स्तर एक से स्तर 5) शामिल है। इस बदलाव का उद्देश्य पिछली सात-सूत्री प्रणाली को बदलकर संस्थानों के भीतर शिक्षा और अनुसंधान की गुणवत्ता और स्थिरता को बढ़ाना है। कार्यक्रम के अंत में दोनों विषय विशेषज्ञ को प्राचार्य द्वारा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

सहायक प्राध्यापक अर्थशास्त्र श्री रवि देवांगन ने दोनों विषय विशेषज्ञ को उनके ज्ञानवर्धक एवं लाभप्रद व्याख्यान के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बतलाया कि संस्थानों की आंतरिक गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ हमें अपने खुद की आंतरिक गुणवत्ता बढ़ाने हेतु प्रयास करना होगा। आत्मावलोकन करना एक सचेतन आंतरिक प्रयास है जिसके लिए हम सभी को प्रयास करना चाहिए। इसके द्वारा हम अपने शक्ति, कमजोरी क्षमताओं आदि को को समझ सकते हैं एवं अपनी बाह्य क्रियाओं के प्रति सजक, सतर्क, जागृत एवं विवेकशील हो सकते हैं।

कार्यक्रम का कुशल संचालन अ. सहा. प्राध्यापक गणित निलेश तिवारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रतिमा चंद्राकर तथा अ. सहा. प्राध्यापक  मुकेश कुमार सिन्हा, माधुरी दीवान, शिखा साहू ,चित्रेश बरेठ, श्री हरि शंकर नाथ, संजय कुमार, आलोक त्रिलोक हिरवानी, डॉ. ग्लैडिस मैथ्यू , क्रीड़ा अधिकारी त्रिपेश साहू तथा प्रयोगशाला तकनीशियन शेषनारायण साहू  एवं जगतारण बघेल के साथ साथ छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कौशल साहू एवं सविता तुर्के ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


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