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CG : PRSU ने पीएचडी नियमों में किया बदलाव, साक्षात्कार में आए 50 प्रतिशत से कम अंक तो नहीं कर सकेंगे PHD

रायपुर। पं. रविशंकर शुक्ल विवि ने पीएचडी नियमों में बदलाव करते हुए यह आदेश निकाला है कि वे शिक्षक जिन्हें पीएचडी प्रवेश के लिए लिए जाने वाले साक्षात्कार में 50 प्रतिशत से कम अंक हासिल होंगे, उन्हें पीएचडी करने की पात्रता नहीं होगी। इससे फर्क नहीं पड़ता कि रविवि के शिक्षकों को पीएचडी के लिए आयोजित की गई लिखित प्रवेश परीक्षा में कितने अंक मिले हैं। यदि वे लिखित परीक्षा में शीर्ष पर हैं और इंटरव्यू में 50 प्रतिशत अंक हासिल नहीं कर सके हैं, तो उन्हें अपात्र कर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा इस नए नियम के संदर्भ में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। अर्थात प्रबंधन ने यह नहीं बताया है कि नियमों में यह अजीबो-गरीब बदलाव क्यों किए गए हैं। गौरतलब है कि यूजीसी पीएचडी में प्रवेश के लिए केवल न्यूनतम योग्यता ही तय करती है। अधिकतम योग्यता तय करने का अधिकार विश्वविद्यालयों के पास होता है।


साक्षात्कार 30 अंकों का 


रविवि के शिक्षकों के अलावा सामान्य कैंडिडेट को यदि साक्षात्कार में शून्य अंक भी मिलते हैं, तब भी वे पीएचडी करने के लिए पात्र होंगे। गौरतलब है कि रविवि द्वारा पीएचडी प्रवेश परीक्षा संबंधित नियमों को पिछले वर्ष बदला गया था। नए नियम के मुताबिक, लिखित परीक्षा के साथ-साथ साक्षात्कार प्रक्रिया से भी कैंडिडेट्स को गुजरना होगा। इसके पूर्व तक केवल लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ही अभ्यर्थियों का चयन पीएचडी के लिए किया जाता रहा है। पीएचडी प्रवेश परीक्षा के अंतर्गत साक्षात्कार 30 अंकों के होते हैं।


विद्यापरिषद की बैठक में पारित 


जनवरी माह में आयोजित की गई विद्यापरिषद की बैठक में इस नए नियम को अनुमोदित कर दिया गया है। पीएचडी के लिए वर्तमान में चल रही प्रक्रिया में यह नियम लागू होगा। अनुसूचित जाति-जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के कैंडिडेट्स को अंकों में 5% की छूट प्रदान की गई है।

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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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