अंधकार में, बिना बिजली जीवन जीना क्या होता है, इसका अंदाज़ा सिर्फ़ वही लगा सकता है जिसने इस मुश्किल को सहा हो इसीलिए 21वीं शताब्दी में भी देश के 18 हज़ार से ज़्यादा गाँवों को जब इस अभी शाप से छुटकारा मिला और उनकी ज़िंदगी भी बिजली की रोशनी से रोशन हुई तो देश ने विकास का एक अहम पड़ाव पार कर लिया।