प्राचार्य की कुर्सी का छह शिक्षकों में बंटवारा! सरकारी स्कूल... - CG Sandesh

प्राचार्य की कुर्सी का छह शिक्षकों में बंटवारा! सरकारी स्कूल में अनोखा आदेश, DEO ने किया निरस्त

खैरागढ़ : सरकारी स्कूल में प्राचार्य की कुर्सी को लेकर जारी एक अनोखे आदेश ने शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी है। जिला मुख्यालय स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी/अंग्रेजी माध्यम शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला में प्राचार्य द्वारा जारी आदेश में छह व्याख्याताओं को अलग-अलग दिनों के लिए प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंप दी गई। मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश को तत्काल निरस्त कर दिया।

जानकारी के मुताबिक स्कूल के प्राचार्य कमलेश्वर सिंह ने 24 जुलाई 2026 को आदेश जारी किया था। आदेश के तहत प्रथम पाली में संचालित अंग्रेजी माध्यम स्कूल की व्यवस्था के लिए हिंदी माध्यम के छह व्याख्याताओं को सप्ताह के अलग-अलग दिनों में प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया था। आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी को भी भेजी गई थी।

सोमवार से शनिवार तक अलग-अलग प्रभारी

जारी आदेश के अनुसार कुणाल टंडन को सोमवार, गिरवर कोसरे को मंगलवार, विनिता सिंह को बुधवार, उपमा देवी त्रिपाठी को गुरुवार, गुंजन सिंह को शुक्रवार और अखिलेश श्रीवास्तव को शनिवार की जिम्मेदारी दी गई थी।

इन प्रभारी प्राचार्यों को संविदा शिक्षकों की उपस्थिति, अध्यापन व्यवस्था और विद्यार्थियों के अनुशासन की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। यानी सप्ताह के छह दिनों में स्कूल की प्राचार्य की जिम्मेदारी छह अलग-अलग शिक्षकों के हाथों में रखने का आदेश जारी किया गया था।

DEO ने आदेश को किया तत्काल निरस्त

मामले में जिला शिक्षा अधिकारी मुकुल केपी साव ने कहा कि आदेश की जानकारी मिलते ही उन्होंने प्राचार्य को फटकार लगाई और आदेश को तत्काल निरस्त कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब स्कूल में नियमित प्राचार्य पदस्थ हैं, तो उनकी मौजूदगी में किसी अन्य शिक्षक को प्रभारी प्राचार्य नहीं बनाया जा सकता।

वहीं, शाला विकास समिति के अध्यक्ष आलोक श्रीवास ने कहा कि उन्हें इस आदेश की कोई जानकारी नहीं थी और प्राचार्य द्वारा इस संबंध में उनसे कोई चर्चा भी नहीं की गई।

अब सवाल यह है कि आखिर किस आधार पर प्राचार्य की मौजूदगी में छह शिक्षकों को अलग-अलग दिन प्रभारी प्राचार्य बनाने का आदेश जारी किया गया और विभागीय अधिकारियों को इसकी प्रतिलिपि क्यों भेजी गई।


भ्रष्टाचार को बढ़ावा और मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस निति को चुनौती देता जनसंपर्क विभाग, पीजीपोर्टल, जनशिकायत, सीएमहेल्पलाइन लाइनपर की गई शिकायत सब बेअसर

पीजी पोर्टल में शिकायत के बाद भी नहीं मिल रहा न्याय, जाँच प्रणाली में सुधार की आवश्यकता, आजादी के 79 साल बाद भी शिकायत के जाँच में स्वतंत्रता नही.


अन्य सम्बंधित खबरें