सरायपाली : मुस्तफीज आलम ने वोटर लिस्ट में मतदाताओं का ब्लड ग्रुप दर्ज करने हेतु दिया सुझाव
देश भर में लाखों परिवारों की जिंदगी उपचार में रक्त की कमी के कारण बचाना अब एक नई पहल से संभव हो सकती है। छत्तीसगढ़ की रक्तदान सेवा समिति के अध्यक्ष मुस्तफीज आलम ने भारत निर्वाचन आयोग से एक अनोखा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सुझाव दिया है, जिसमें वे कहते हैं कि वोटर लिस्ट में मतदाताओं का ब्लड ग्रुप भी दर्ज किया जाना चाहिए।
मुस्तफीज जी बताते हैं कि अक्सर उन्हें ऐसे परिवारों से फोन आते हैं, जिनके पास सही प्रकार का रक्त न होने की वजह से जान बचाना मुश्किल हो जाता है। उनका मानना है कि अगर वोटर आईडी में रक्त समूह का उल्लेख हो, तो आपातकाल में सही रक्तदाता तुरंत मिल सकेगा और अनगिनत जानें बचाई जा सकेंगी।
उन्होंने यह सुझाव दिया है कि मतदाता पंजीकरण और नवीनीकरण के वक्त बूथ लेवल अधिकारी (BLO) वैकल्पिक रूप से रक्त समूह की जानकारी लें, जो मतदाता पहचान पत्र में दर्ज हो। यह डेटा केवल आपातकालीन जरूरत पड़ने पर अधिकृत संस्थाओं और रक्त बैंकों के साथ साझा किया जाएगा, जिससे व्यक्तिगत गोपनीयता बनी रहे।
इस प्रक्रिया से न केवल रक्तदान को बढ़ावा मिलेगा बल्कि एक राष्ट्रीय स्तर का रक्तदाता डेटाबेस भी तैयार होगा, जो हजारों जरूरतमंदों तक जीवनदायिनी रक्त पहुंचाने में मददगार साबित होगा।
ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर विभिन्न राज्यों, जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में दुर्लभ (Rare) ब्लड ग्रुप वाले रक्तदाताओं की जानकारी भी उपलब्ध है। इससे अस्पताल और रक्त बैंक बेहद कम समय में दुर्लभ रक्त समूह वालों तक पहुंचकर मरीजों की जान बचा सकते हैं। इस पहल के साथ ही देश में नए, ज्यादा सटीक और व्यापक रक्त सेवा नेटवर्क का निर्माण होगा।
मुस्तफीज आलम कहते हैं, “यह कोई केवल तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि एक सामाजिक बदलाव का अवसर है। जब हर मतदाता खुद को रक्तदाता के रूप में देखेगा, तो रक्तदान को आम जनजीवन का हिस्सा बनाना आसान होगा।”
उनका यह भी कहना है, “हम उम्मीद करते हैं कि चुनाव आयोग इस जनहित विषय को समझेगा और इसे लागू करने में तेजी दिखाएगा। हम सभी से अपील करते हैं कि इस मुहिम में आवाज उठाएं, इस विचार को आगे बढ़ाएं और रक्तदान की संस्कृति को देश में मजबूत बनाएं।”