सरायपाली : जांच में बाधा, दबाव की राजनीति, लिमगांव स्कूल मामला बना प्रशासन की अग्निपरीक्षा।
महासमुन्द जिले के सरायपाली विकासखण्ड अन्तर्गत शासकीय उच्च प्राथमिक शाला लिमगांव में फर्जी उपस्थिति शिकायत का प्रकरण अब महज एक प्रशासनिक जांच का विषय नही रहा, बल्कि यह ईमान, कर्तव्य और नेताओ के हस्तक्षेप के सीधे टकराव का प्रतीत बन चुका है। जांच में अनावश्यक विलंब और राजनीतिक दबाव के आरोप लगने से शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल खडे कर दिए है।
जांचकर्ता अधिकारियो ने इस प्रकरण में अब राजनीतिक दबाव में जांच नही कर पाने का हवाला देकर जिला स्तरीय जांच दल गठित करने हेतु पत्र भेजा है, बहरहाल इस मामले में विजय लहरे जिला शिक्षा अधिकारी ने जांचकर्ताओ की इस मांग को खारिज करके तत्काल जांच प्रतिवेदन जमा करने हेतु 23 जनवरी को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए है।
शिकायतकर्ता विनोद कुमार दास ने 18 फरवरी 2025 को सुबोध सिंह सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय, सिद्वार्थ कोमल परदेशी सचिव स्कूल शिक्षा विभाग सहित जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द को लिखित शिकायत किया है। आरोप है कि प्रधानपाठक धनीराम चौधरी लकवाग्रस्त थे। तब 01 वर्ष से अधिक समय तक विद्यालय में अनुपस्थित रहे। जबकि उनकी जगह पर जितेन्द्र साहू बाहरी युवक को मानदेय देकर उससे अध्यापन कराया गया है। इसके बाबजूद उपस्थिति पंजी में नियमित हस्ताक्षर होते रहे, जिससे फर्जी उपस्थिति का गंभीर संदेह उत्पन हो रहा है। हालांकि तात्कालीन एसडीएम सरायपाली के औचक निरीक्षण एवं पंचनामा बयान में धनीराम चौधरी एक वर्ष से स्कूल में अनुपस्थित होने की पुष्टि हुआ है।
जांच में हुआ बयान दर्ज।
बताना जरूरी है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने 03 नवम्बर 2025 को चार सदस्यीय जांच दल गठित कर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। जांच अधिकारियो ने 11 दिसम्बर को लिमगांव स्कूल पहुंच कर शिक्षको का बयान दर्ज किया। 12 दिसम्बर को तात्कालीन बीईओ सरायपाली सहित 02 सहायक विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी को बयान देने हेतु बीईओ कार्यालय बसना बुलाया था। जिसमें तीनो बसना पहुंचे थे।
नेताओं का फोन से जांच अधिकारियों में बैठ गया डर।
इस मामले में जांचकर्ता अधिकारी बद्रीविशाल जोल्हे (प्रभारी बीईओ बसना), लोकेश्वर सिंह कंवर (एबीइओ बसना), अनिल सिंह साव (प्रभारी बीआरसीसी बसना), क्षीरोद्र पुरोहित (प्राचार्य आत्मानंद स्कूल बसना) के द्वारा 22 जनवरी को संयुक्त हस्ताक्षरित पत्र डीईओ महासमुन्द को भेजा। पत्र के अनुसार जांचकर्ता अधिकारियो को जांच के दौरान कई राजनीतिक व्यक्तियो के फोन करके जांच को पक्ष विपक्ष में मोडने का दबाब बनाया जा रहा है, आगे इन्होने बताया कि मिडिया में एक आइएएस स्तर के अधिकारी(तात्कालीन एसडीएम सरायपाली) का नाम भी उछाला गया है। मामला संवेदनशील है, जिस कारण जांच टीम दबाब महसूस कर रही है। ऐसी परिस्थति में स्वतंत्र रूप से जांच कर पाना संभव नही है। चर्चा है इसकी भी जांच जरूरी है कि ये किस राजनीतिक पार्टियो के कौन प्रभावशाली व्यक्ति है, जिन्होने दबाब बनाकर जांच को प्रभावित करने का कोशिश किया है।