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सरायपाली : कार्यवाही के इंतज़ार में बीत गए 30 साल, फाइलें पीली हो गईं, बिक गई जमीन, लेकिन नही मिला न्याय.

30 साल हो गए, फाइलें पीली हो गईं, जमीन भी बिक गई, लेकिन इंतज़ार इसलिए ज़िंदा है क्योंकि कार्रवाई सो रही है. मामला महासमुंद जिला से जुड़े शिक्षा विभाग का है, जहाँ आज एक पुत्र पिता की मौत के 30 साल बाद भी पिता के नाम पर मिली अनुकम्पा नियुक्ति के जांच की मांग कर रहा है. लेकिन अब तक उसे एक जाँच प्रतिवेदन भी नहीं मिल पा रहा है.

मामला उस समय का है जब छत्तीसगढ़ अविभाजित मध्यप्रदेश का हिस्सा हुआ करता था, सरायपाली रायपुर जिले के अंतर्गत आया करता था, जहाँ सरायपाली तहसील क्षेत्र के ग्राम चकरदा के प्राथमिक शाला में पदस्थ थे कन्हैया लाल चौहान. इस दौरान वर्ष 1991 में कन्हैया लाल चौहान की मृत्यु हो जाती है. जिसके बाद कन्हैया लाल चौहान के परिवार को मिलने वाली अनुकम्पा नियुक्ति को फर्जी तरीके से संत लाल मुखर्जी द्वारा हासिल कर लिया जाता है.

संत लाल मुखर्जी को कन्हैया लाल चौहान की पत्नी रुक्मणि बाई द्वारा नजदीकी रिश्तेदार बताकर अनुकम्पा नियुक्ति दिलाई जाती है, इस बात की जानकारी जब कन्हैया लाल चौहान के माँ कर्मायत बाई को होती है तो वह इस नियुक्ति के खिलाफ संयुक्त लोक शिक्षण संचनालय रायपुर में शिकायत करती है.

कर्मायत बाई नियुक्ति के खिलाफ लोक शिक्षण संचनालय रायपुर को शिकायत करते हुए बताती है कि उसकी बहु रुक्मणि बाई ने शासन को धोखा देते हुए संत लाल मुखर्जी को अपना नजदीकी रिश्तेदार बताकर उसे अनुकम्पा नियुक्ति दिला दिया, जबकि कन्हैया लाल चौहान की माँ कर्मायत बाई ने बताया कि संत लाल मुखर्जी उनका कोई नजदीकी रिश्तेदार नही है.  

कर्मायत बाई ने लोक शिक्षण संचनालय रायपुर को बताया था कि कन्हैया लाल चौहान का एक नाबालिग पुत्र है जिसके रहते यह नियुक्ति किसी और को नहीं दी जा सकती, तथा उन्होंने कन्हैया लाल चौहान के पुत्र के बालिग होने तक किसी अन्य व्यक्ति को नियुक्ति ना दिए जाने तथा दिए गए नियुक्ति को निरस्त करने की मांग की थी.

कर्मायत बाई बताती है कि उसकी बहु पुत्र कन्हैया लाल चौहान के मृत्यु के पूर्व ही कहीं अन्यत्र चली गई थी, जिसके बाद कन्हैया लाल चौहान के पुत्र प्रेमसागर का कोई पालन पोषण करने वाला नहीं था, कर्मायत बाई ने प्रेमसागर को अपने पास रख पालन पोषण किया.

कर्मायत बाई ने कार्यालय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण रायपुर संभाग रायपुर को वर्ष 1995 में संतलाल मुखर्जी सहायक शिक्षक की अनुकम्पा नियुक्ति की जांच कर नियुक्ति निरस्त करने की मांग की थी. जिस पत्र पर आवश्यक कार्यवाही हेतु उप संचालक लोक शिक्षण शिक्षा महासमुंद को पत्र प्रेषित किया गया जिसमें यह उल्लेख था कि शासन की नियमों के प्रकाश में आवश्यक कार्यवाही करते हुए इस कार्यालय और आवेदिका कर्मायत बाई को अवगत करावे.

परंतु आज लगभग 30 वर्षों बीत जाने के बाद भी आवेदिका कर्मायत बाई को किसी प्रकार से न्याय नहीं मिला आवेदिका के कथन अनुसार कुछ लोगों द्वारा उसे न्याय दिलाने की झूठी उम्मीदें मिलती रही, तथा कर्मायत बाई अपने नन्हे से पोते को लेकर न्याय मिलने की उम्मीद में अपने पास रखे जमा पूंजी भी खाली होने लगी.

लेकिन इसके बाद भी कर्मायत बाई की आस नहीं टूटी उसने अपने बचे कूचे जमीन को बेचकर न्याय में लगने वाले को खर्चों को वहन किया, एक समय ऐसा आया जब उसने अपने पोते प्रेम सागर चौहान के भरण पोषण व खुद के भरण पोषण के लिए लोगों के घर बर्तन मांजने को मजबूर होना पड़ा.

इधर साल गुजरते गए अनुकंपा पर नियुक्त हुआ सहायक शिक्षक प्रधानपाठक के पद पर पदोन्नत हुआ और संकुल समन्वय तक बन गया, पर अब तक उस पर किसी भी प्रकार से कार्यवाही तो दूर जांच तक नहीं की गई. वही जब कन्हैया लाल का पुत्र प्रेम सागर बालिग हुआ तो वह भी अपने पिता के अपने और अपने परिवार पर आपबीती पर न्याय के लिए अपने बूढ़ी दादी कर्मायत बाई के साथ न्याय के लिए संघर्षों को देखते हुए न्याय पाने के लिए शासन प्रशासन से अपनी गुहार लगाने लगा.

वही इस संदर्भ में प्रेस रिपोर्टर फिरोज खान ने बताया कि संत लाल मुखर्जी के नियुक्ति संबंधित दस्तावेज आरटीआई के माध्यम से प्राप्त किया है और कुछ ऐसे दस्तावेज जो संत लाल मुखर्जी द्वारा लिए गए अनुकम्पा नियुक्ति को फर्जी साबित करने में अधिकारियों को सहयोग प्रदान कर सकते है, ऐसे तथ्यों और दस्तावेजों के साथ 14 अक्टूबर 2025 को कलेक्टर के माध्यम से जांच करने व उचित कार्यवाही हेतु आवेदन आवेदक फिरोज खान द्वारा किया गया था पर तीन माह बीत जाने के बाद भी कोई जांच कार्यवाही नहीं होने से पुनः 20 जनवरी 2026 को कलेक्टर जनदर्शन महासमुंद में स्मरण पत्र के माध्यम से जांच एवं उचित कार्यवाही हेतु अवगत कराया गया.

बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं होने से संत लाल मुखर्जी पर है किसी बड़े नेता का हाथ होना बताया जा रहा है. जिनके द्वारा अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है.


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