सरायपाली : अफसर झुके, व्यवस्था शर्मसार—चपरासी जांच की मांग।
महासमुन्द जिला अन्तर्गत सरायपाली ब्लाक के शासकीय मिडिल स्कूल लिमगांव की जांच प्रकरण सुर्खियो में है। अब शिक्षा विभाग के 04 वरिष्ठ चपरासियो से जांच की मांग शिकायतकर्ता विनोद कुमार दास ने विजय लहरे डीईओ महासमुन्द से की है। जांच अधिकारियो का जांच से पीछे हटना और जिला शिक्षा अधिकारी का चिटठी-चिटठी खेल किये जाने से विभाग की कलई खोल दी है। सूत्रो ने बताया कि ऐसे दर्जनो मामले है। जिनमें अधिकारी का वरहस्त है, निजी स्वार्थ है। इसी कारण ये ‘मासिक योजना‘ को बंद किये जाने से दिक्कत है।
जांचकर्ताओ बद्रीविशाल जोल्हे (प्रभारी बीईओ बसना), लोकेश्वर सिंह कंवर (एबीइओ बसना), अनिल सिंह साव (प्रभारी बीआरसीसी बसना), क्षीरोद्र पुरोहित (प्राचार्य आत्मानंद स्कूल बसना) का आरोप है कि राजनीतिक पार्टी के नेताओ के द्वारा फोन करके दबाब बनाते है। जबकि सूत्रो की माने तो ऐसा नही हुआ है। यदि इसमें सच्चाई होती तो जांच अधिकारी राजनीतिक पार्टी के उन नेताओ का नाम बताते, बल्कि नही छुपाते।
मालूम हो कि इस घटनाक्रम ने छत्तीसगढ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 03 की खुली अवहेलना का संकेत दिया है। जिसमें प्रत्येक शासकीय सेवक को सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता एवं निर्भीकता से कर्तव्य निर्वहन का दायित्व सौपा गया है। दबाव के नाम पर जांच से पीछे हटना न केवल नियमो की भावना के विरूद्व है, बल्कि भविष्य की सभी जांचो के लिए खतरनाक उदाहरण भी बन सकता है। इससे यह प्रतीत होता है कि ये चारो जांच अधिकारी अपने पद के अनुरूप सौंपी गई भरोसे के लायक नही है। जिनका नेताओ के फोन आने से घिग्घी बंध गई है।
बताना जरूरी है कि हेमंत रमेश नंदनवार आइएएस तात्कालीन एसडीएम सरायपाली ने 11 अगस्त 2023 को शासकीय मिडिल स्कूल लिमगांव का औचक निरीक्षण किया। जांच में पाया कि वहां के धनीराम चौधरी प्रधानपाठक लकवाग्रस्त एक वर्ष से अनुपस्थित है। उसकी जगह में बाहरी युवक जितेन्द्र साहू को 6500 रूपये मासिक मानदेय पर अध्यापन करवाने रखा था। जिसका पंचनामा एवं बयान हुआ। जिसमें बीईओ कार्यालय सरायपाली के दो एबीइओ डी.एन दीवान एवं जितेन्द्र रावल का भी दस्तखत है।
अब निगाहे प्रशासन पर टिकी है कि वह दबाव के आगे झुकता है, या सच्चाई के साथ खडा रहता है।