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बसना में नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ संपन्न, चार सेवाभावी श्रद्धालुओं ने किया नेत्रदान का संकल्प

मनहरण सोनवानी. बसना के सुप्रसिद्ध गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित तीन दिवसीय कन्या कौशल एवं नारी सशक्तिकरण शिविर तथा नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ का भव्य समापन हुआ। इस आयोजन में न केवल आध्यात्मिक चेतना का प्रसार हुआ, बल्कि सामाजिक सरोकार की मिसाल भी पेश की गई, जहाँ चार श्रद्धालुओं ने मरणोपरांत नेत्रदान के लिए संकल्प पत्र भरकर मानवता की सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।

​भव्य कलश यात्रा और घोष दल का सहयोग

​कार्यक्रम की शुरुआत भव्य मंगल कलश यात्रा से हुई, जिसमें सरस्वती शिशु मंदिर पिरदा के घोष दल का विशेष सहयोग रहा। कलश यात्रा के पश्चात नौ कुंडीय महायज्ञ का शुभारंभ हुआ, जिसमें क्षेत्र के लगभग 2000 से अधिक श्रद्धालुओं ने आहुतियां डालीं।

​महायज्ञ के दौरान आयोजित बौद्धिक सत्रों में सीताराम विश्वकर्मा जी ने 'मनुष्य जीवन की समस्या और समाधान' पर व्यावहारिक दिशा-निर्देश दिए। इसके उपरांत देवराज मिश्र ने 'मनुज देवता बनें, बने यह धरती स्वर्ग समान' विषय पर प्रेरणादायक व्याख्यान देते हुए मानवीय मूल्यों को पुनर्स्थापित करने पर बल दिया।

​सामाजिक चेतना, नेत्रदान का महासंकल्प

​आयोजन की सबसे विशेष उपलब्धि सामाजिक चेतना के प्रति श्रद्धालुओं का उत्साह रहा। पूज्य गुरुदेव के 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के संदेश से प्रेरित होकर चार व्यक्तियों ने नेत्रदान हेतु फॉर्म भरा। उनके इस निर्णय की गायत्री परिवार और नगरवासियों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।

​माता जी की जन्म शताब्दी और संस्कार सत्र

​रात्रि में माता भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी पर भावपूर्ण वीडियो प्रदर्शन किया गया। अंतिम दिन शांति कुंज हरिद्वार की प्रशिक्षित टोली द्वारा नौ कुंडीय यज्ञ के साथ पुंसवन, दीक्षा, मुंडन, नामकरण और जन्मदिवस उत्सव जैसे विभिन्न संस्कार नि:शुल्क संपन्न कराए गए। कार्यक्रम के समापन पर प्रत्येक श्रद्धालु को ऋषि साहित्य भेंट किया गया। गायत्री शक्तिपीठ बसना द्वारा इस आयोजन को सफल बनाने हेतु सभी नगरवासियों का आभार व्यक्त किया गया।


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