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सरायपाली : जांच में देरी बर्दाश्त नहीं—डीईओ ने कहा, रिपोर्ट दो वरना कार्रवाई तय

महासमुंद जिले में शिक्षा विभाग की एक गंभीर शिकायत की जांच में हो रही देरी पर जिला शिक्षा अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित जांच अधिकारियों को सख्त चेतावनी जारी की है। जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि जांच कार्य को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है, जो न केवल उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना है बल्कि विभागीय छवि को भी नुकसान पहुँचा रहा है।

मामला बसना विकासखंड के शासकीय उच्च प्राथमिक शाला लिमगांव से जुड़ा है, जहाँ एक लकवाग्रस्त प्रधानपाठक धनीराम चौधरी के लंबे समय से अनुपस्थित रहने और उसके स्थान पर दूसरे व्यक्ति जितेन्द्र साहू को मानदेय देकर पढ़ाई करायें जाने की शिकायत विनोद कुमार दास ने किया है।

शिकायत मिलने के बाद 3 नवम्बर को जांच आदेश जारी हुए, परंतु निर्धारित समयसीमा के बावजूद जांच पूरी नहीं की गई। उलटे जांच अधिकारियों ने 22 एवं 29 जनवरी को जांच दल बदलने की मांग कर प्रक्रिया को और लंबा खींचने की कोशिश की गई।

डीईओ विजय लहरे ने 4 फरवरी को पत्र में साफ लिखा है कि किसी भी प्रकार के राजनीतिक या अन्य दबाव के बिना निष्पक्ष जांच करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। देरी को गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चेताया गया है कि जांच पूरी न होने की स्थिति में संबंधित जांच अधिकारियों के विरुद्ध उच्च स्तर पर कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की होगी।

जांच अधिकारी बद्रीविशाल जोल्हे, लोकेश्वर सिंह कंवर, अनिल सिंह साव, क्षीरोद्र पुरोहित को इस सख्त चेतावनी मिलने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच रिपोर्ट कितनी जल्दी सामने आती है और कथित अनियमितताओं पर क्या ठोस कार्रवाई होती है।


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