बसना : छत्तीसगढ़ में कार्रवाई नहीं होने से आम जनता परेशान, कार्यकर्ताओं के साथ अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय पहुंचे राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रांत महामंत्री, नहीं मिले अधिकारी.
छत्तीसगढ़ में कई मामलों में कार्रवाई नहीं होने से आम नागरिक के साथ-साथ संगठन के नेता भी परेशान है, कई मामलों में कार्रवाई चाहे किसी भी स्तर पर की जाए जाँच के नाम पर अधिकारी कुछ भी नहीं कर रहे हैं, बीते कुछ दिनों में शिकायत पर कार्रवाई ना करने का मामला बढ़ने लगा है, शिकायत चाहे आप अनुविभागीय अधिकारी से करें, कलेक्टर से करें, मुख्य सचिव से करें या फिर प्रधानमंत्री कार्यालय से करें.
अधिकतर मामलों में जाँच की कमान उन्ही अधिकारी को सौंप दिया जा रहा है जिनपर आरोप लगाये जा रहे हैं, यह बिल्कुल बिल्ली से दूध की रखवाली कराने जैसा है. जिसके बाद जाँच पर लीपा-पोती कर दी जाती है और कई बार तो जाँच ही आगे नहीं बढ़ पाती है, प्रशासन द्वारा किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होने से अब लोगों का भरोसा विष्णु के सुशासन से उठ चूका है, भले ही विष्णु सरकार सुशासन के नाम पर तिहार मना ले समाधान शिविर लगा ले लेकिन आज भी कई शिकायतें ऐसी है जो अधूरी की अधूरी पड़ी है. जब प्रधानमंत्री स्तर पर की गई शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो आम जनता अब राज्य सरकार पर क्या ही भरोसा करेगी.
शिकायत पर कार्रवाई का ना होना, कारवाई का कई दिनों तक लंबित रहना इस बात को अब छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकाशशील भी मानने लगे हैं, हाल ही जन शिकायत पोर्टल पर उन्होंने अधिकारयों के लिए एक आदेश जारी कर चिंता जताई की लोक अर्जियां जिनमे शिकायत भी शामिल है वह दिन ब दिन बढ़ती जा रही है, जो की चिंतनीय है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा की अगर 21 दिन के भीतर इसपर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो इसका महत्त्व समाप्त हो जाता है. वर्त्तमान में लंबित प्रकरण की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है.
आपको बता दें की केवल जनशिकायत पोर्टल पर ही 37842 से अधिक लंबित शिकायतें है, जो अपनी कार्रवाई का इंतज़ार कर रही है. ऐसे में सवाल यह भी है की आखिर क्यों इतनी शिकायतें बढ़ती जा रही है ? क्या देश-प्रदेश में भ्रष्टाचार बढ़ गया है. क्या आम जनता अब वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली से नाखुश है.
आपको बता दें बसना नगर में राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रदेश नेता प्रांत महामंत्री महेंद्र साव पिछले तीन महीने से एक शिकायत को लेकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जिसपर उन्होंने अब जाँच के नाम पर लीपा पोती का आरोप लगा दिया है. महेंद्र साव कहते हैं कि छत्तीसगढ़ अलग राज्य बनने के बाद अधिकारी राज पहली बार देखने को मिला है, जिसमे अधिकारी द्वारा जाँच करने मे आनाकानी हो रही है. ये लोकतंत्र की हत्या है प्रशासनिक अधिकारी को इस विषय पर ध्यान देने की आवश्यकता है.
उन्होंने बताया कि बसना के क़ृषि उपज मंडी के एक मामले में उन्होंने 3 महीने पहले शिकायत की थी, जिसकी अब तक किसी प्रकार की कोई जाँच नहीं हो पाई है. वही धान खरीदी केंद्र बसना की भौतिक जाँच के लिये अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन दिये 6 दिन बीत जाने पर भी जाँच नहीं किया गया. उनके द्वारा 7 नवंबर 2026 को क़ृषि उपज मंडी के अधिकारी के ऊपर जाँच के लिये दस्तावेज सहित शिकायत की गई थी परन्तु आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई. वही दिनांक 4 फरवरी 2026 को धान खरीदी केंद्र बसना की भौतिक सत्यापन के लिये अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को आवेदन दिया गया था उक्त आवेदन पर भी अधिकारी द्वारा किसी भी प्रकार से सक्रियता नहीं दिखाई गई जिससे मामले की लीपा पोती करने की संभावना जताई जा रही है. उनका कहना है कि 15 हजार क्विंटल धान की खरीदी की गई, जो की कहीं दिखाई नहीं दे रहा है. यह सारा आम जनता का पैसा है, जिसका दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है. जिस मामले में आज हम यहाँ कारवाई करने पहुंचे, लेकिन दोपहर के 12 बजे तक भी सारे जिम्मेदार अधिकारी कार्यालय से नदारद हैं.