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महासमुंद : कलेक्टर ने की मातृ मृत्यु निगरानी एवं शिशु मृत्यु अंकेक्षण की समीक्षा

कलेक्टर विनय लंगेह ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक लेकर मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया तथा शिशु मृत्यु अंकेक्षण की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए समयबद्ध, संवेदनशील एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

कलेक्टर लंगेह ने निर्देश दिए कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाले प्रकरणों की समय पर पहचान कर उनका सतत फॉलोअप किया जाए। गर्भावस्था के साथ-साथ पोस्ट प्रेग्नेंसी (डिलीवरी के बाद) केयर पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की जटिलता को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सभी गर्भवती महिलाओं को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार नियमित जांच, पोषण परामर्श एवं आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए।

बैठक में कलेक्टर ने विशेष रूप से नर्सिंग केयर की गुणवत्ता पर जोर देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदना का समावेश अनिवार्य है। उन्होंने निर्देशित किया कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए और उनकी देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। साथ ही उन्होंने कहा कि मरीजों को विशेष काउंसलिंग की आवश्यकता होती है। अतः इसे व्यवहार में लाएं। भर्ती कक्ष में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर परिणाम के लिए समुदाय के साथ सतत भागीदारी भी आवश्यक है। कलेक्टर ने कहा कि एम्बुलेंस सेवा को भी ज्यादा सुलभ और लोगों की पहुंच तक आसानी से उपलब्ध कराया जाएगा।

समीक्षा के दौरान सीएमएचओ डॉ. आई. नागेश्वर राव ने बताया कि पिछले एक वर्ष में जिले में अब तक कुल 09 मातृ मृत्यु के प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनका विस्तृत ऑडिट किया गया है। कलेक्टर ने सभी मामलों का गहन विश्लेषण करते हुए कारणों की समीक्षा की। जिसमें लगभग 70 से 75 प्रतिशत मामलों में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी प्रमुख कारण रही है। इस पर उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में रेफरल सिस्टम को और मजबूत किया जाए, तथा समय पर उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों में उपचार सुनिश्चित किया जाए।

कलेक्टर लंगेह ने कहा कि प्रत्येक मातृ एवं शिशु मृत्यु के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उसका वैज्ञानिक तरीके से अंकेक्षण किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित किया कि डेटा आधारित मॉनिटरिंग, नियमित समीक्षा एवं फील्ड स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी आई. नागेश्वर राव, जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती नीलू धृतलहरे, टीकाकरण अधिकारी श्री अरविंद गुप्ता सहित स्वास्थ्य विभाग के बीएमओ, चिकित्सा अधिकारी उपस्थित थे।


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