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बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जबरन इस्तीफा मामला पलटा, सहायक प्राध्यापक की सेवा बहाली का आदेश

बिलासपुर :  में निजी महाविद्यालय में कार्यरत सहायक प्राध्यापक से जबरन इस्तीफा लिए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कॉलेज प्रबंधन के आदेश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को बड़ी राहत दी है और उसे सेवा में पुनः बहाल करने का निर्देश दिया है।

जबरन इस्तीफा का आरोप, दबाव और धमकी का मामला आया सामने

चौकसे इंजीनियरिंग कॉलेज बिलासपुर में सहायक प्राध्यापक आशीष कुमार खंडेलवाल के रूप में कार्यरत थे। आरोप है कि उन पर दबाव बनाकर 21 सितंबर 2020 को इस्तीफा लिया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि सहकर्मियों चित्रकांत टाइगर और जय किशन गुप्ता की ओर से धमकी और दबाव के चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। साथ ही उनके लंबित वेतन और अन्य देयक भी जारी नहीं किए गए।

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में हुई सुनवाई, प्रबंधन के तर्क खारिज

इस मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडे की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने पाया कि प्रबंधन ने 23 सितंबर 2020 को इस्तीफा स्वीकार कर लिया और अगले ही दिन ईमेल के जरिए इसकी जानकारी दी गई। हालांकि अदालत ने यह भी नोट किया कि इस्तीफा स्वीकार करने से पहले किसी तरह की निष्पक्ष जांच नहीं की गई थी।


कोर्ट ने माना इस्तीफा वैध नहीं, प्रबंधन के आदेश को किया रद्द

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर यह इस्तीफा स्वैच्छिक नहीं माना जा सकता। इसलिए प्रबंधन द्वारा इसे स्वीकार करना भी अवैध है। अदालत ने कॉलेज प्रबंधन का आदेश रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को पूरी सेवा बहाली का अधिकार दिया।

वेतन बकाया और सभी लाभ देने का आदेश, कर्मचारी को बड़ी राहत

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को इस्तीफा स्वीकार किए जाने की तारीख 23 सितंबर 2020 से लेकर सभी बकाया वेतन और परिणामी लाभ प्रदान किए जाएं। इस फैसले को कर्मचारी अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।




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