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ब्रेकिंग : राहुल गांधी के खिलाफ FIR करने हाईकोर्ट ने दिया आदेश

डेस्क। लखनऊ हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है. दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में आज सुनवाई हुई. ये मामला निचली अदालत के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया गया था.

लखनऊ हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है. दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आज ये फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार या तो ख़ुद जांच करे या सेंट्रल एजेंसी को रेफर करके जांच कराये. लेकिन ये आरोप जांच का विषय है. यह मामला रायबरेली ट्रायल कोर्ट से ख़ारिज होने के बाद हाईकोर्ट पहुंचा था.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने ये याचिका दाखिल की थी. याचिकाकर्ता ने लखनऊ की विशेष सांसद-विधायक अदालत के 28 जनवरी, 2026 के आदेश को चुनौती दी थी. लखनऊ की विशेष सांसद-विधायक अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने की उसकी याचिका खारिज कर दी थी.

लखनऊ की सांसद-विधायक अदालत ने कहा था कि वह नागरिकता के मुद्दे पर फैसला करने के लिए सक्षम नहीं है.

 

याचिकाकर्ता कर्नाटक का एक भाजपा कार्यकर्ता है. उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और इस मामले में उनके खिलाफ विस्तृत जांच की मांग की थी. उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, सरकारी गोपनीयता कानून, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट एक्ट के तहत गांधी के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने ये याचिका दाखिल की थी. याचिकाकर्ता ने लखनऊ की विशेष सांसद-विधायक अदालत के 28 जनवरी, 2026 के आदेश को चुनौती दी थी. लखनऊ की विशेष सांसद-विधायक अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने की उसकी याचिका खारिज कर दी थी.

लखनऊ की अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका
यह शिकायत शुरू में रायबरेली की विशेष सांसद-विधायक अदालत में दायर की गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता विग्नेश की याचिका पर, इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ पीठ ने 17 दिसंबर, 2025 को उक्त आपराधिक शिकायत मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था. लखनऊ की सांसद-विधायक अदालत ने 28 जनवरी, 2026 को उक्त याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने उच्‍च न्‍यायालय का रुख किया था.



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