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CG : राखड़ का डेम टूटा, राख की चपेट में आने से जेसीबी ऑपरेटर की मौत

कोरबा। जिले में रविवार को एक बड़ा हादसा सामने आया। यहां हसदेव ताप विद्युत संयंत्र के ग्राम झाबू स्थित राखड़ डेम का एक हिस्सा अचानक टूट गया। डेम टूटते ही राख का तेज बहाव नीचे की ओर फैल गया, जिसकी चपेट में आकर एक जेसीबी ऑपरेटर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और एचटीपीपी संयंत्र प्रबंधन को लेकर कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है।

जानकारी के मुताबिक हसदेव ताप विद्युत मंडल के झाबू स्थित राखड़ उेम में राज की तरह आज भी रेजिंग का काम चल रहा था। बताया जा रहा है कि पोकलेन और जेसीबी मशीन राखड़ बांध पर फलिंग का काम कराया जा रहा था। इसी दौरान दोपहर के वक्त बांध के अंदर दबाव अचानक बढ़ गया, जिसके चलते बांध का ऊपरी हिस्सा भरभराकर टूट गया। देखते ही देखते राख का सैलाब करीब 70 फीट नीचे आ गिरा। घ्ज्ञटना के वक्त मौके पर मिट्टी फिलिंग के काम में लगा एक जेसीबी राख के तेज बहाव की चपेट में आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों नें बताया कि जेसीबी आपरेटर संभल पाता, इतनी देर में ही वह मशीन समेत राख के दलदल में दब गया।

मौके पर मौजूद कुल पांच मजदूरों में से पोकलेन ऑपरेटर और एक अन्य मजदूर सहित अन्य किसी तरह जान बचाने में सफल रहे।हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही प्रबंधन और सुरक्षा टीम मौके पर पहुंची। लेकिन राहत कार्य शुरू होने में देरी होने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि एक जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने के बाद वापस लौट गया। इसके बाद करीब दोपहर 2 बजे पुलिस मौके पर पहुंची और शव को निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।

रविवार होने के कारण बड़ा हादसा टल गया
इस घटना ने एक बार फिर एचटीपीपी प्रबंधन की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह राखड़ डेम तीसरी बार टूटा है और पहले भी इसकी कमजोर स्थिति को लेकर चेतावनी दी गई थी। बावजूद इसके डेम की ऊंचाई बढ़ाने के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। घटना के बाद मजदूरों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। मौके पर मौजूद श्रमिकों की माने तो अन्य दिनों की अपेक्षा आज रविवार छुट्टी का दिन होने के कारण अधिकाश मजदूर छुट्टी पर थे। जरूरी काम के लिए मशीन और आपरेटर को लगाया गया था। यदि यहीं हादसा वर्किंग डे में होता, तो मरने वालों की संख्या अधिक हो सकती थी।


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