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महासमुंद जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव निकला गैस के गबन का मुख्य षड्यंत्रकारी, डील में मिले थे 50 लाख, तीन गिरफ्तार

एलपीजी कैप्सूल से गबन के मामले में महासमुंद पुलिस ने जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है.

जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव पुलिस द्वारा जप्त की गई एलपीजी कैप्सूल से 1.5 करोड़ के गैस के गबन का मुख्य षड्यंत्रकारी निकले. उन्होंने गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर के साथ मिलकर गबन की योजना बनाई.

आपको बता दें कि सिंघोड़ा पुलिस ने 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल को माह 24 दिसम्बर 2025 में जप्त किया गया था. तथा भीषण गर्मी पड़ने पर एवं सिंघोडा में सुरक्षा के मानक उपबंधों की पर्याप्त व्यवस्था न होने से भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए,  उक्त 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखवाने हेतु पुलिस अधीक्षक महासमुंद ने जिला कलेक्टर महासमुंद को पत्र लिखा था.

जिसके बाद उक्त 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर रखवाने हेतु निर्देशित किया गया था,  उक्त आदेश के परिपालन में दिनांक 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग से खाद्य निरीक्षक अविनाश दुबे, खाद्य अधिकारी हरिश सोनेश्वरी एवं मनीष यादव के उपस्थिति में ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स के संतोष सिंह ठाकुर को 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को सुपुर्दनामा में दिलवाया गया.

सुपुर्दनामा के बाद संतोष सिंह ठाकुर के द्वारा उक्त 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को अपने कर्मचारियों के माध्यम से थाना सिंघोड़ा से ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स ग्राम उरला थाना अभनपुर जिला रायपुर ले गये.

उक्त 06 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रकों को सुरक्षार्थ रखने हेतु ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स संतोष सिंह ठाकुर पिता मूलसिंह ठाकुर उम्र 56 वर्ष साकिन ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स ग्राम उरला थाना अभनपुर जिला रायपुर छ.ग. को न्यस्त किया गया था.

जांच के दौरान 03 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल ट्रक में करीब 50 टन LPG गैस कीमती लगभग 45,00,000 रूपये तथा गुणाशेखरन के 02 नग LPG गैस से भरी हुई कैप्सुल में 37 टन LPG गैस कीमती 32,00,000 रूपये को ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स के सुपुर्दनामा में लेने वाले संतोष सिंह ठाकुर के द्वारा मिलीभगत कर उक्त 05 नग LPG कैप्सुल ट्रक गैस भरा हुआ के संबंध में आपराधिक न्यास भंग करना पाया गया.

कुल 87 टन LPG गैस कीमती करीब 77,00,000 रूपये का ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स के सुपुर्दनामा में लेने वाले संतोष सिंह ठाकुर तथा अन्य डायरेक्टर, संचालक, मैनेजर व अन्य व्यक्तियों के विरूद्ध अपराध क्रमांक 42/26 धारा 316(3), 3(5) बीएनएस का अपराध घटित करना पाये जाने पर धारा सदर का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

कब हुई षड़यंत्र की शुरुआत

सुपुर्दनामा के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय से कलेक्टोरेट कार्यालय को लिखे गए प्रथम पत्र के कुछ दिन बाद ही 23 मार्च को हुई षड्यंत्र की पहली बैठक रखी गई.

खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर ने 1 करोड़ के गबन की पटकथा लिखी दी.

अजय यादव ने पंकज चंद्राकर को क्रियान्वयन और सही एजेंसी को ढूंढने का जिम्मा दिया पंकज चंद्राकर ने पहली षड्यंत्रकारी बैठक में ही मनीष चौधरी का नाम सुझाया.  मनीष को विभिन्न एजेंसियों को संपर्क करने का काम दिया गया.

कैसे हुआ मूल्यांकन-

गैस की मात्रा के जानकारी के बिना पैसो के मूल्यांकन में मुश्किल हो रही थी डील, 26 मार्च को दोनों सूत्रधार खाद्य अधिकारी अजय यादव और पंकज चंद्राकर गैस की मात्रा का आंकलन करने सिंघोड़ा थाना पहुंचे.

6 कैप्सूल में कुल 105 मीट्रिक टन का अनुमान लगाया गया, और तुरंत 1 करोड़ के सपने पर मुहर लगा दी गयी.

मनीष चौधरी को फ़ोन पर संपर्क कर उसी दिन संभावित एजेंसी को बुलाने के लिए बताया गया, मात्रा और पैसे के बाद मनीष ने भी देरी नहीं की.  

26 मार्च को ही रात 11 बजे तीनो षड्यंत्रकारियों की एक गैस एजेंसी के मालिक के साथ मध्यरात्रि को बैठक हुई.

पहली एजेंसी के मालिक ने मजबूती से इसमें शामिल होने से इनकार किया, मनीष को और एजेंसियों से संपर्क करने का जिम्मा दिया गया. इसके बाद मनीष चौधरी ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल से डील पक्की की. खाद्य अधिकारी के 80 लाख के मांग को ठाकुर ने माना और सुपुर्दनामे लेने के लिए हामी भरी,

किसकी क्या जिम्मेदारी

खाद्य अधिकारी अजय यादव परदे के पीछे के मुख्य खिलाडी थे, पंकज चंद्राकर के जिम्मे गबन और डील का चेहरा बन कर क्रियान्वयन की पूरी जिम्मेदारी था.

डील को महासमुंद से दूर रखने के लिए रायपुर के मनीष चौधरी को जिम्मेदारी दी गयी थी, जिसे रायपुर के एजेंसियों से बात कर डील को अंतिम कड़ी तक पहुंचाना था. *किसके हिस्से में

कितना, पैसे के लेन देन का क्रम और प्रक्रिया-

प्रयास 1 करोड़ के डील की थी, ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक के साथ 80 लाख में डील फाइनल हुई थी. सबसे बड़ा 50 लाख का हिस्सा खाद्य अधिकारी अजय यादव को सुपुर्दनामे के दूसरे ही दिन 31 मार्च को घर में डिलीवर हुआ.

30 लाख रकम जुगाड़ने में देरी हो रही थी, ठाकुर पर भरोसा भी कम था, ठाकुर के अकाउंट से मनीष चौधरी के अकाउंट में गिरवी surety के रूप में 30 लाख डलवाया गया.

बाद में 1 हफ्ते के अंदर ठाकुर से मनीष चौधरी को 30 लाख रकम दिया. 10 लाख मनीष चौधरी ने अपने हिस्से में रखा और 20 लाख पंकज चौधरी को अपने हिस्से के मिले.

रकम के लेन देन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मनीष चौधरी ने अपने अकाउंट में गिरवी रखे हुए 30 लाख ठाकुर के अकाउंट में वापस कर दिए.

कूटरचित वजन पंचनामा की कहानी-

सिर्फ गैस और पैसों के साथ ही नहीं, कागजों के साथ भी खेल खेला गया. कैप्सूल्स के सुपुर्दनामे के बाद एक हफ्ते तक एक एक करके कैप्सूल खाली करने के बाद 6 एवं 8 अप्रैल को ख़ाली कैप्सूल्स का वजन कराया गया.

वजन के दौरान न तो ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक उपस्थित थे न ही कोई गवाह, वजन प्रक्रिया का एक फ़र्ज़ी पंचनामा महासमुंद में खाद्य अधिकारी के कार्यालय में बनवाया गया. उस पंचनामा में भी वही षड्यंत्रकारी मनीष चौधरी और पंकज चंद्राकर स्वतंत्र गवाह बने जो कैप्सूल्स के सुपुर्दनामे में गवाह बनाये गए थे और जिन्होंने खुद ही 92 टन एलपीजी गैस का गबन कर 80 लाख रुपये उगाही की थी.

आश्चर्य यह भी है की ये कूटरचित वजन पंचनामा का दस्तावेज 8 अप्रैल के दोपहर को ही कलेक्टोरेट के आवक जावक में पहुंच गए थे, जबकि वजन कांटा के रजिस्टर और पर्ची के अनुसार एक कैप्सूल का वजन 8 अप्रैल को ही, रात 8 बजे के बाद हुआ है.

पल्ला झाड़ने की कार्ययोजना-

कोर्ट से सुपुर्दनामा आदेश और पुलिस की सक्रियता के बाद सभी षड्यंत्रकारियों के होश उड़ने शुरू हो गए. 20 अप्रैल के रात 8 से 10 बजे तक पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और संतोष ठाकुर की आरंग के ढाबे में हुई बैठक मंथन हुई, सब कुछ पुलिस पर डालकर पल्ला झाड़ने और दबाव बनाने की योजना बनाई थी .सबको अपने अपने बयान पर कायम रहने के निर्देश दिए गए थे.

*गिरफ्तार आरोपी-*

1-पंकज चंद्राकर पिता पवन चंद्राकर उम्र 35 वर्ष सा. हाउसिंग बोर्ड काॅलोनी एमआईजी 140, बीटीआई रोड़ महासमुन्द जिला महासमुन्द।          

2-मनीष चौधरी पिता स्व0 राधेश्याम चौधरी उम्र 52 वर्ष पता-ए-2/502 लखजोरा अपार्टमेंट मेन रोड मोवा रायपुुर।

3-अजय कुमार यादव पिता रामफल यादव उम्र 49 वर्ष सा. बी. 70 फेस 02, राजकिशोर नगर बिलासपुर जिला बिलासपुर छ.ग. हाल हाउसिंग बोर्ड काॅलोनी महासमुन्द जिला महासमुन्द छ.ग.।

जप्त सामग्री-

01-पंकज चंद्राकर-01 नग मोबाईल, नगदी 13000/- रूपये।

02-मनीष चैधरी- सोनू ट्रेडर्स दूकान से 5,11,900/- रूपयें का होम अप्लायंस का सामान, 01 नग मोबाईल एवं नगद 8000/- रू.।

03- अजय कुमार यादव- 1 नग मोबाईल, नगदी 78,800/-रू. व एक काले रंग का बैंग।

जुमला जप्त संपत्ति किमती- 6,11,700 र

इस प्रकार उपरोक्त प्रकरण में आपराधिक न्यास भंग, आपराधिक षडयंत्र, कूट रचना एवं शासकीय संपत्ति का व्यापारिक हित हेतु हेराफेरी कालाबाजारी करना पाये जाने से धारा 316(3), 316 (5), 61, 238, 336 (3), 338, 340(2) बीएनएस 3,7 ई.सी. एक्ट लगाया जाकर की जा रही है कड़ी कार्यवाही।



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