जच्चा-बच्चा मौत मामले में निजी अस्पताल जांच के घेरे में, चिकित्सीय प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
भानुप्रतापपुर में जच्चा-बच्चा की दर्दनाक मौत के बाद निजी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले ने अब जनचर्चा के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी तूल पकड़ लिया है। बढ़ते जनदबाव और लगातार उठ रहे सवालों के बीच जांच टीम शुक्रवार को संबंधित निजी अस्पताल पहुंची, जहां इलाज से जुड़े दस्तावेजों और चिकित्सीय प्रक्रियाओं की गहन जांच की गई।
जांच टीम ने अस्पताल में भर्ती से लेकर उपचार तक की पूरी प्रक्रिया का बारीकी से परीक्षण किया। इस दौरान सोनोग्राफी रिपोर्ट, ड्यूटी रिकॉर्ड, मरीज की मेडिकल फाइल और डॉक्टरों द्वारा लिए गए चिकित्सीय निर्णयों की जांच की गई।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकारी चिकित्सकों ने गर्भवती महिला की स्थिति को गंभीर बताते हुए तत्काल सीजर ऑपरेशन की सलाह दी थी, तब निजी अस्पताल द्वारा किन परिस्थितियों में नॉर्मल डिलीवरी का प्रयास किया गया। इस निर्णय को लेकर अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वहीं अस्पताल प्रबंधन के दावों और सामने आई सोनोग्राफी रिपोर्ट के तथ्यों में दिखाई दे रही विसंगतियों ने मामले को और अधिक संदेह के घेरे में ला दिया है। सूत्रों के मुताबिक जांच टीम उपचार के प्रत्येक चरण, चिकित्सकीय निर्णयों और संभावित लापरवाही के बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा कर रही है।
फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।