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बसना : 47 बार रक्तदान कर बचा चुके हैं कई जिंदगियां, 100 बार रक्तदान का संकल्प लेकर सेवा की मिसाल बन रहे सुभाष जगत

सेवा, संवेदनशीलता और मानवता जब किसी व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य बन जाए तो उसका हर कार्य समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। बसना विकासखंड के ग्राम गुढ़ियारी निवासी 46 वर्षीय सुभाष चंद्र जगत ऐसे ही एक व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने निस्वार्थ सेवा को जीवन का संकल्प बना लिया है। 

सामान्य कृषक परिवार में जन्मे और आठवीं तक शिक्षा प्राप्त सुभाष जगत ने यह साबित कर दिया कि समाज सेवा के लिए बड़े संसाधनों या उच्च शिक्षा से अधिक जरूरी संवेदनशील सोच और मजबूत इच्छाशक्ति होती है। 

अब तक वे 47 बार स्वैच्छिक रक्तदान कर कई जरूरतमंदों को नया जीवन दे चुके हैं और उन्होंने 65 वर्ष की आयु तक 100 बार रक्तदान करने का लक्ष्य तय किया है। सुभाष जगत ने वर्ष 2007 में पहली बार गांव के ही एक प्रसूता महिला की जान बचाने के लिए रक्तदान किया था। 

उस एक घटना ने उनके भीतर सेवा का ऐसा भाव जगाया कि फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद जब भी किसी जरूरतमंद को रक्त की आवश्यकता हुई, वे बिना किसी स्वार्थ के मदद के लिए आगे आते रहे। उनकी सेवा भावना का सबसे भावुक प्रसंग सितंबर 2025 में सामने आया। 

उस समय उनके पिता उद्देराम जगत को रक्त की आवश्यकता पड़ी, लेकिन उसी महीने पहले ही रक्तदान कर चुके होने के कारण वे चिकित्सकीय नियमों के चलते स्वयं रक्त नहीं दे पाए। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। तभी उन्होंने संकल्प लिया कि वे अधिक से अधिक लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करेंगे ताकि भविष्य में किसी जरूरतमंद को रक्त के अभाव का सामना न करना पड़े। खास बात यह है कि सुभाष जगत किसी रक्तदान समिति या बड़े संगठन से जुड़े नहीं हैं। 

क्षेत्र के किसी गांव में जब भी किसी मरीज को रक्त की आवश्यकता होती है, लोग सीधे उनसे संपर्क करते हैं और वे हर संभव सहयोग के लिए तैयार रहते हैं। वे फुलझर अंचल के गनेकेरा, नवागांव, भूकेल, खरोरा अन्तरझोला, मोहन्दा, चकरदा, रेमड़ा सहित अनेक गांवों जरूरतमंदों को रक्तदान कर चुके है। 

सुभाष जगत की जीवनशैली उन लोगों के लिए भी जवाब है जो रक्तदान को लेकर भ्रम रखते हैं। नियमित और चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप रक्तदान करने के बावजूद उनके स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। बल्कि ग्राम गुढ़ियारी में उनकी पहचान सबसे ताकतवर, मेहनती और सक्रिय व्यक्तियों में होती है। 

ग्रामीण बताते हैं कि गांव में जब भी कोई कठिन या मेहनत वाला कार्य सामने आता है तो सबसे पहले सुभाष जगत का नाम लिया जाता है। रक्तदान के साथ-साथ उनका सामाजिक जीवन भी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है। 

गांव में साफ-सफाई अभियान, पौधरोपण, शिक्षा जागरूकता, खेलकूद और धार्मिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है। इतना ही नहीं, गांव के किसी भी घर में शादी-विवाह, दशकर्म, छठी या अन्य सामाजिक कार्यक्रम होने पर वे स्वयं पहुंचकर खाना बनाने और अन्य महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में भी सहयोग करते हैं। 

उनकी इसी सहज सेवा भावना ने गांव के युवाओं को भी प्रभावित किया है और अब कई युवा नियमित रक्तदान के लिए आगे आने लगे हैं। सुभाष जगत कहते हैं रक्तदान महादान है। इससे किसी को नया जीवन मिलता है और समाज में प्रेम, भाईचारा और मानवता की भावना मजबूत होती है। 

सुभाष चंद्र जगत की यात्रा यह संदेश देती है कि समाज बदलने के लिए बड़े पद या संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े दिल, निरंतर सेवा और मानवता के संकल्प की आवश्यकता होती है।


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गौरीशंकर मानिकपुरी

गौरीशंकर मानिकपुरी स्नातक की पढ़ाई के बाद, मीडिया के क्षेत्र में आज उन्हें क्षेत्रीय और जमीनी पत्रकारिता का 7 वर्षों का लंबा और गहरा अनुभव है। क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों से सटीक 'आंचलिक खबरें' निकालना और आम जनता के हक की आवाज़ को बेबाकी से उठाना उनकी मुख्य विशेषता है। निष्पक्ष और खोजी रिपोर्टिंग के जरिए वे लगातार पाठकों तक ग्राउंड ज़ीरो का सच पहुंचा रहे हैं। संपर्क: +91 7746859354
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