बसना : भीषण गर्मी के बीच स्कूल खुलने पर उठे सवाल, अभिभावकों ने 1 जुलाई से नियमित कक्षाएं शुरू करने की उठाई मांग
छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत 16 जून से हो चुकी है, लेकिन भीषण गर्मी के बीच स्कूल खोलने के फैसले को लेकर अभिभावकों और शिक्षाविदों के बीच चिंता और बहस तेज हो गई है। बसना विकासखंड में संचालित कुल 398 विद्यालयों जिनमें 356 शासकीय, 02 अनुदान प्राप्त, 38 निजी तथा 02 मदरसा विद्यालय शामिल हैं जिसमे शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं।
वहीं क्षेत्र में दिन का तापमान अब भी 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने से बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि इतनी तेज गर्मी में विशेषकर छोटे बच्चों को स्कूल भेजना स्वास्थ्य की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
उनका तर्क है कि जब घरों में कूलर और एसी भी गर्म हवाओं के प्रभाव को पूरी तरह कम नहीं कर पा रहे हैं, तब सीमित संसाधनों वाले विद्यालयों में बच्चों का लंबे समय तक रहना चिंता का विषय बन सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल सामने आ रहे हैं। कई स्थानों पर बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। अनेक स्कूलों में पर्याप्त पंखे, ठंडे पेयजल और गर्मी से बचाव की व्यवस्थाएं सीमित बताई जा रही हैं। ऐसे में अभिभावक नियमित कक्षाओं के संचालन से पहले आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का भी मानना है कि वर्तमान मौसम परिस्थितियों को देखते हुए विद्यालयों में बिजली, पेयजल, पंखे और गर्मी से राहत के पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चे अत्यधिक गर्मी और लू के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे में तेज धूप में आवागमन और गर्म वातावरण में लंबे समय तक रहने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए कई अभिभावकों ने शासन से स्कूल संचालन की व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और नियमित पढ़ाई को फिलहाल स्थगित कर 1 जुलाई से कक्षाएं प्रारंभ करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि शिक्षा आवश्यक है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
फिलहाल स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन भीषण गर्मी के बीच बच्चों की सुरक्षा, सुविधाओं और पढ़ाई के संतुलन को लेकर चर्चा लगातार जारी है।