पांच साल में उजड़ गया सपनों का ठिकाना, ताले में कैद हुआ फुलझ... - CG Sandesh

पांच साल में उजड़ गया सपनों का ठिकाना, ताले में कैद हुआ फुलझर वाचनालय

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का केंद्र रहा बसना का एकमात्र वाचनालय, अब उपेक्षा के बीच पुनर्जीवन की उम्मीद

जहां एक ओर सरकार युवाओं को बेहतर अध्ययन वातावरण देने के लिए आधुनिक लाइब्रेरी, कोचिंग सुविधाएं और अध्ययन केंद्र विकसित कर रही है, वहीं दूसरी ओर बसना क्षेत्र का कभी युवाओं की उम्मीद, मेहनत और सपनों का केंद्र रहा फुलझर वाचनालय आज बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा के दौर से गुजर रहा है। जिस जगह पर कभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे विद्यार्थियों की ऊर्जा, किताबों की खुशबू और भविष्य के सपनों की हलचल दिखाई देती थी, वहां आज ताले लटक रहे हैं। 

कभी ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह प्रयास अब बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। बसना क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने तथा युवाओं को यूपीएससी, पीएससी, बैंकिंग, रेलवे, एसएससी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनपद पंचायत परिसर में फुलझर वाचनालय की स्थापना की गई थी। 

इसका उद्देश्य उन ग्रामीण और प्रतिभावान विद्यार्थियों को अवसर देना था, जो आर्थिक या अन्य कारणों से बड़े शहरों में जाकर कोचिंग नहीं कर सकते थे।पूर्व जनपद पंचायत सीईओ सनत महादेवा की पहल और दूरदर्शी सोच से फरवरी 2021 में बसना के पूर्व विधायक राजा देवेन्द्र बहादुर सिंह एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में इसका शुभारंभ किया गया। पुराने जनपद पंचायत भवन को जिला खनिज न्यास मद से लगभग 2 लाख 49 हजार 570 रुपये की लागत से जीर्णोद्धार कर अध्ययन केंद्र के रूप में तैयार किया गया। 

वहीं पुस्तकों के संरक्षण के लिए आलमारी, स्टडी टेबल और कुर्सियों पर लगभग 1 लाख 17 हजार 700 रुपये खर्च किए गए तथा करीब 70 से 80 हजार रुपये की पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं। शुरुआती दिनों में यह वाचनालय विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का स्थान भर नहीं रहा, बल्कि प्रेरणा और आत्मविश्वास का केंद्र बन गया। बसना नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बच्चे और युवा यहां नियमित रूप से अध्ययन करने पहुंचते थे। 

स्कूली विद्यार्थियों का भ्रमण कराया जाता था और उन्हें पढ़ाई, करियर तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति जागरूक किया जाता था। तत्कालीन जनपद सीईओ सनत महादेवा स्वयं विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें लक्ष्य तय करने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। ग्रामीण क्षेत्र के कई बच्चों ने यहीं बैठकर अधिकारी बनने के सपने देखे। कई विद्यार्थियों को अपने भविष्य की दिशा इसी वाचनालय से मिली। 

यही नहीं, गांवों से आने वाले सरपंच, सचिव, बुजुर्ग और महिलाएं भी यहां आकर ज्ञान अर्जित करती थीं। धीरे-धीरे यह स्थान शिक्षा के साथ सामाजिक जागरूकता का भी केंद्र बन गया था। लेकिन समय के साथ यह सपना प्रशासनिक उपेक्षा की भेंट चढ़ता गया। तत्कालीन सीईओ नवंबर 2024 के स्थानांतरण के बाद वाचनालय की नियमित देखरेख लगभग बंद हो गई। न तो इसके संचालन की स्थायी व्यवस्था बनाई गई और न ही पुस्तकों और सुविधाओं के रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान दिया गया। 

पिछले दो-तीन वर्षों में यहां नई पुस्तकें या अध्ययन सुविधाओं के विस्तार को लेकर कोई उल्लेखनीय पहल नहीं हुई। आज स्थिति यह है कि पुस्तकालय में अधिकांश समय ताला लगा रहता है और इसके एक हिस्से में सीएससी का संचालन किया जा रहा है। कर्मचारियों की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह वाचनालय धीरे-धीरे अपनी पहचान खोता जा रहा है। स्थानीय विद्यार्थियों और युवाओं का मानना है कि यदि इस वाचनालय को फिर से सक्रिय किया जाए, नई पुस्तकें जोड़ी जाएं और नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए तो यह एक बार फिर ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए अवसरों का द्वार बन सकता है।

मामले में जनपद पंचायत सीईओ पीयूष सिंह ठाकुर ने कहा कि वाचनालय के संचालन में कर्मचारियों की कमी एक प्रमुख चुनौती रही है। उन्होंने बताया कि जिला पंचायत सीईओ से वाचनालय के बेहतर रखरखाव और नियमित संचालन को लेकर निर्देश प्राप्त हुए हैं। आने वाले समय में वाचनालय को पुनः अपग्रेड कर जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय सहयोग से व्यवस्थित और बेहतर तरीके से संचालित करने की दिशा में पहल की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों और युवाओं को फिर से अध्ययन की बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सके।


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गौरीशंकर मानिकपुरी

गौरीशंकर मानिकपुरी स्नातक की पढ़ाई के बाद, मीडिया के क्षेत्र में आज उन्हें क्षेत्रीय और जमीनी पत्रकारिता का 7 वर्षों का लंबा और गहरा अनुभव है। क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों से सटीक 'आंचलिक खबरें' निकालना और आम जनता के हक की आवाज़ को बेबाकी से उठाना उनकी मुख्य विशेषता है। निष्पक्ष और खोजी रिपोर्टिंग के जरिए वे लगातार पाठकों तक ग्राउंड ज़ीरो का सच पहुंचा रहे हैं। संपर्क: +91 7746859354
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