बोधघाट परियोजना के विरोध में 56 गांवों की बड़ी बैठक, विधायक विक्रम मंडावी ने किया समर्थन
दंतेवाड़ा : बस्तर संभाग की लंबे समय से विवादों में रही बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर प्रभावित क्षेत्रों में एक बार फिर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। परियोजना क्षेत्र में चल रहे सर्वेक्षण कार्य के बीच ग्रामीणों की आशंकाएं बढ़ने लगी हैं। इसी कड़ी में रविवार को बारसूर के हिताल कूडूंम में प्रभावित गांवों के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और बोधघाट बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों की बड़ी बैठक आयोजित की गई।
बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने एक स्वर में बोधघाट परियोजना का विरोध करते हुए अपनी पुश्तैनी जमीन नहीं देने का संकल्प लिया। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आजीविका, कृषि भूमि, जंगल और सांस्कृतिक पहचान इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है, इसलिए उनकी सहमति के बिना किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित बोधघाट परियोजना से दंतेवाड़ा, बीजापुर, बस्तर और नारायणपुर जिले की 18 पंचायतों के कुल 56 गांव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकते हैं। प्रभावित क्षेत्र के लोगों का मानना है कि परियोजना के कारण बड़े पैमाने पर विस्थापन की स्थिति निर्मित होगी।
बैठक में शामिल बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने भी ग्रामीणों की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बोधघाट परियोजना से चार जिलों की 18 पंचायतों के 56 गांवों के लगभग 50 हजार से अधिक आदिवासी प्रभावित होंगे। इतने बड़े स्तर पर विस्थापन संभव नहीं है और इससे आदिवासी समाज की जीवनशैली, संस्कृति और आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
विधायक मंडावी ने राज्य सरकार से परियोजना को तत्काल रोकने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि जब-जब भाजपा की सरकार सत्ता में आई है, तब-तब जल, जंगल और जमीन को नुकसान पहुंचाने वाले निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी जमीन और संसाधनों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे तथा परियोजना के विरोध में आगे भी आंदोलन को तेज किया जाएगा।