आस्था और भाईचारे का संदेश लेकर निकले ताजिया जुलूस, शांतिपूर्ण रहा आशूरा-ए-मुहर्रम
नई दिल्ली : देशभर में शनिवार को आशूरा-ए-मुहर्रम श्रद्धा, आस्था और आपसी सद्भाव के माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों और शहरों में मुस्लिम समुदाय ने हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुहर्रम की दसवीं तारीख यानी आशूरा के मौके पर ताजिया जुलूस निकाले गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। शाम के समय परंपरा के अनुसार ताजियों को निर्धारित स्थानों पर सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
आशूरा का दिन पैगंबर मुहम्मद के नवासे हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की उस महान कुर्बानी की याद दिलाता है, जिन्होंने कर्बला की जंग में सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। इस दिन को त्याग, बलिदान और अन्याय के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
मुहर्रम के अवसर पर देशभर में मजलिसों और धार्मिक सभाओं का आयोजन किया गया, जहां उलेमाओं ने हज़रत इमाम हुसैन के जीवन, उनके आदर्शों और कर्बला की घटना के महत्व पर प्रकाश डाला। कई स्थानों पर लोगों ने शर्बत और लंगर का भी आयोजन किया तथा मानवता और भाईचारे का संदेश दिया।
जुलूसों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए विभिन्न राज्यों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, जबकि प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने लगातार निगरानी रखी। पूरे देश में आशूरा-ए-मुहर्रम शांतिपूर्ण, श्रद्धापूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।