मोहरा फिल्टर प्लांट में फिटकरी संकट, डोंगरगढ़-रिसाली से मंगाकर चला जलशोधन का काम
राजनांदगांव : शहर की पेयजल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मोहरा फिल्टर प्लांट में फिटकरी का पर्याप्त स्टॉक नहीं होने के कारण गुरुवार को जलशोधन का काम प्रभावित हुआ। स्थिति ऐसी बनी कि तत्काल पानी की सप्लाई बनाए रखने के लिए डोंगरगढ़ और रिसाली (भिलाई) से फिटकरी मंगानी पड़ी। इस बीच शहर के कई इलाकों में पिछले तीन दिनों से मटमैला पानी आने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
जानकारी के अनुसार, लगभग 300 करोड़ रुपये की अमृत मिशन योजना के बावजूद फिल्टर प्लांट में जलशोधन के लिए आवश्यक फिटकरी का पर्याप्त भंडारण नहीं किया गया। बारिश के कारण शिवनाथ नदी का पानी अधिक मटमैला होने से फिटकरी की जरूरत बढ़ गई, लेकिन स्टॉक की कमी के चलते कम मात्रा में फिटकरी डालकर ही पानी शुद्ध किया जा रहा था। इसका असर शहर की जल गुणवत्ता पर पड़ा और लोगों को गंदे पानी की समस्या का सामना करना पड़ा।
बारिश में बढ़ जाती है फिटकरी की जरूरत
मोहरा फिल्टर प्लांट में सामान्य दिनों में सुबह और शाम की जलापूर्ति के लिए प्रतिदिन 5 से 7 टन फिटकरी की आवश्यकता होती है। वहीं, बारिश के मौसम में नदी का पानी अधिक गंदा होने के कारण इसकी जरूरत बढ़कर करीब 8 टन प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। इसके बावजूद पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं होने से जलशोधन प्रभावित हुआ।
नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले ने आरोप लगाया कि फिटकरी की कमी के कारण शहरवासियों को गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में भी निगम की तैयारियां नाकाफी साबित हुई हैं। जलशोधन के लिए उपयोग होने वाली फिटकरी लगभग खत्म हो गई थी, जिसके चलते निगम को डोंगरगढ़ से करीब दो टन फिटकरी मंगाकर काम चलाना पड़ा।
35 टन फिटकरी पहुंची, जल्द और सप्लाई
फिटकरी का स्टॉक खत्म होने के बाद शुक्रवार सुबह 35 टन फिटकरी प्लांट पहुंचाई गई। अधिकारियों के मुताबिक यह स्टॉक करीब पांच दिनों तक ही पर्याप्त रहेगा। ठेका कंपनी के प्रतिनिधि नितिन पाटिल ने बताया कि शुक्रवार को अतिरिक्त 5 टन फिटकरी और पहुंचने की संभावना है, जिससे जलशोधन की व्यवस्था सामान्य रखने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, यह मामला एक बार फिर नगर निगम की पेयजल प्रबंधन व्यवस्था और बारिश से पहले की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है।