राजनांदगांव में खाद की किल्लत से किसान परेशान, दो-तीन किस्तों में मिल रही खाद, डीएपी की कमी से बढ़ी चिंता
राजनांदगांव : लगातार तीन दिनों की बारिश के बाद राजनांदगांव जिले में खरीफ सीजन की खेती ने रफ्तार पकड़ ली है। खेतों में बुवाई का काम तेज होने के साथ ही किसान खाद लेने के लिए सहकारी समितियों (सोसाइटियों) का रुख कर रहे हैं। हालांकि, समितियों में पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं होने से किसानों को दो से तीन किस्तों में खाद दी जा रही है, जिससे उन्हें बार-बार सोसाइटी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
दो-तीन बार आना पड़ रहा, बढ़ रहा खर्च
खाद की कमी के कारण बड़े किसानों को तीन किस्तों में और छोटे किसानों को दो किस्तों में खाद उपलब्ध कराई जा रही है। पहली खेप मिलने के बाद दूसरी खेप के लिए किसानों को इंतजार करना पड़ रहा है। इससे खेती के काम प्रभावित होने के साथ-साथ परिवहन पर अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है।
ढाबा सोसाइटी पहुंचे ग्राम रातापैली के किसान दिलीप कुमार साहू ने बताया कि 10 बोरी खाद लेने के लिए उन्हें दो बार सोसाइटी आना पड़ा। आने-जाने और वाहन किराए पर ही 700 से 800 रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि लंबे इंतजार के बावजूद समिति में डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण बाजार से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ रही है। उनका आरोप है कि बाजार में यूरिया के लिए भी करीब 900 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
डीएपी की जगह पहुंच रही एनपीके खाद
खरीफ सीजन में किसानों के बीच डीएपी खाद की मांग सबसे अधिक है, लेकिन समितियों में इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। डीएपी के स्थान पर एनपीके खाद पहुंच रही है, जिससे किसान संतुष्ट नहीं हैं। खाद की कमी के चलते कई किसानों को खुले बाजार से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ रही है।
समिति में सीमित भंडारण
किसानों को सहकारी समिति में एसएसपी (50 किलो) 530 रुपये, यूरिया 266.50 रुपये और पोटाश 1,975 रुपये प्रति बोरी की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है।
ढाबा सोसाइटी में 975 किसान पंजीकृत हैं, जहां अब तक 163 टन खाद का वितरण किया जा चुका है। वर्तमान में समिति में केवल:
- यूरिया: 465 बोरी (करीब 20 टन)
- राखड़ खाद: 594 बोरी (करीब 29 टन)
- पोटाश: 108 बोरी (करीब 5 टन)
का भंडारण बचा है, जो किसानों की मांग के मुकाबले काफी कम बताया जा रहा है।
किसानों में बढ़ रही नाराजगी
बार-बार समिति के चक्कर लगाने, डीएपी खाद की कमी और खुले बाजार में अधिक कीमत चुकाने की मजबूरी से किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए, ताकि खेती का काम समय पर पूरा हो सके और अतिरिक्त आर्थिक बोझ से राहत मिल सके।