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दुर्ग : गनियारी में डॉ. तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि, मुख्यमंत्री साय ने किए कई बड़े ऐलान

दुर्ग : पद्म विभूषण और विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के दशगात्र कार्यक्रम में मंगलवार को दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी में हजारों लोग उमड़े। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, प्रदेश सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि, लोक कलाकार और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर दुर्ग सांसद विजय बघेल, विधायक अनुज शर्मा, राज्य मंत्री मोना सेन, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधियों ने दिवंगत लोक कलाकार को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर थीं। उन्होंने पंडवानी गायन के माध्यम से न केवल देश बल्कि विदेशों में भी छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान स्थापित की। उनके निधन से प्रदेश ने लोककला की एक महान विभूति को खो दिया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि डॉ. तीजन बाई के निधन पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी शोक व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर भी डॉ. तीजन बाई के योगदान का विशेष उल्लेख किया था।

मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएं

दशगात्र कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लोककला के संरक्षण और डॉ. तीजन बाई की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं—

  • लोककला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को 'डॉ. तीजन बाई राज्य अलंकरण पुरस्कार' प्रदान किया जाएगा।
  • ग्राम गनियारी के शासकीय विद्यालय का नाम डॉ. तीजन बाई के नाम पर रखा जाएगा।
  • डॉ. तीजन बाई का तंबूरा रायपुर स्थित संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके जीवन और कला से प्रेरणा ले सकें।

उल्लेखनीय है कि पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का 5 जुलाई 2026 को रायपुर स्थित एम्स में निधन हो गया था। उनके दशगात्र कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके लोककला के क्षेत्र में दिए गए अतुलनीय योगदान को याद किया।



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