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छत्तीसगढ़ में श्रद्धा और उल्लास के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, जयघोष से गूंजे शहर; लाखों श्रद्धालु हुए शामिल

रायपुर : आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर गुरुवार को पूरे छत्तीसगढ़ में भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ निकाली गई। भिलाई-3, राजनांदगांव, बस्तर और खैरागढ़ सहित प्रदेश के कई शहरों में हजारों श्रद्धालु भगवान का रथ खींचने पहुंचे। जयघोष, भजन-कीर्तन, शंखनाद और पुष्पवर्षा के बीच निकली रथयात्राओं ने पूरे प्रदेश को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।

भिलाई-3 के गांधी नगर स्थित श्री शिवजी जय जगन्नाथ मंदिर से निकली रथयात्रा इस वर्ष अपने 45वें वर्ष में प्रवेश कर गई। रथयात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के संचालक राम मंगल देवांगन एवं उनके परिवार ने परंपरा के अनुसार 'छेरा पहरा' की रस्म निभाई। इसके बाद रथ गांधी नगर से राम मंदिर, शांति नगर, इंदिरा पारा, बाजार चौक, जीई रोड, आजाद चौक और गैलेक्सी चौक होते हुए मौसी गुंडीचा देवी मंदिर पहुंचा। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ रथ खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

राजनांदगांव में गांधी चौक और प्रभात नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से भगवान की रथयात्रा निकाली गई। रथ शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए जुनीहटरी स्थित मौसी मंदिर पहुंचा। मार्ग में श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना कर पुष्पवर्षा से स्वागत किया। महापौर मधुसूदन यादव भी रथयात्रा में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वर्षों पुरानी इस परंपरा को आज भी श्रद्धालु पूरे उत्साह और आस्था के साथ निभा रहे हैं।

वहीं जगदलपुर में बस्तर की ऐतिहासिक गोंचा महापर्व के तहत भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक रथयात्रा धूमधाम से निकाली गई। 619 वर्षों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा में तुपकी की गूंज, शंखनाद और जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान का रथ खींचा। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया गया। गोंचा महापर्व की विशेष पहचान 'तुपकी' परंपरा रही, जिसमें श्रद्धालु भगवान को सलामी देते हैं। बस्तर राजपरिवार और 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के अनुसार यह परंपरा महाराजा पुरुषोत्तम देव के समय से लगातार निभाई जा रही है और आज भी बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

खैरागढ़ में गैंदबिहारी मंदिर से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा श्रद्धापूर्वक निकाली गई। श्रद्धालुओं ने स्वयं रथ खींचकर भगवान के दर्शन किए। मार्ग में जगह-जगह आरती, पुष्पवर्षा और महाप्रसाद का वितरण किया गया। वहीं पूर्व राजनांदगांव रियासत की राजधानी रहे पांडादाह में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की प्रतिमाओं को भक्तों ने अपने कांधों पर उठाकर मंदिर परिसर की परिक्रमा कराई। तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन और मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

प्रदेशभर में निकली रथयात्राओं के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। विभिन्न शहरों में पुलिस बल तैनात रहा और रथयात्राएं शांतिपूर्ण एवं भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुईं।

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का भी उत्सव है। हर वर्ष की तरह इस बार भी छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ रथ खींचकर भगवान से सुख, समृद्धि और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।



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