संसद से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 पारित, विलंबित पंजीकरण के नियम हुए सख्त
नई दिल्ली : संसद ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक संसद से पास हो गया। इससे पहले लोकसभा इसे मंजूरी दे चुकी थी। विधेयक का उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन कर विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाना है।
नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा। वहीं, दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण संभव होगा।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य विलंबित पंजीकरण के दुरुपयोग को रोकना और प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि देश में जन्म पंजीकरण वर्ष 2014 के 86.6 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 99 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जबकि मृत्यु पंजीकरण 72.5 प्रतिशत से बढ़कर 99.4 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
सरकार का कहना है कि संशोधित व्यवस्था से रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय होंगे तथा पहचान संबंधी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।