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विश्व आदिवासी दिवस पर छत्तीसगढ़ में गूंजा आदिवासी एकता और अस्मिता का संदेश, संस्कृति के रंग में रंगे शहर

रायपुर : विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में आदिवासी समाज ने उत्साह और गरिमापूर्ण तरीके से आयोजन किए। नगरी से लेकर जगदलपुर, छुईखदान और अंबिकापुर तक निकली रैलियों और आयोजित कार्यक्रमों में आदिवासी संस्कृति, परंपरा, भाषा, सामाजिक एकता और संवैधानिक अधिकारों की आवाज बुलंद हुई। पारंपरिक वेशभूषा, मांदर-नगाड़ों की थाप और लोकनृत्यों ने आयोजनों को खास बना दिया।

नगरी में रेला पाटा की थाप पर दिखी आदिवासी एकजुटता

धमतरी जिले के नगरी में जिला सर्व आदिवासी समाज और सर्व आदिवासी समाज तहसील नगरी के तत्वावधान में कृषि उपज मंडी परिसर में जिला स्तरीय विश्व आदिवासी दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद राजा बाड़ा से भव्य रैली निकाली गई, जो बजरंग चौक, बस स्टैंड और रानी दुर्गावती चौक होते हुए कृषि उपज मंडी परिसर पहुंची।

रैली में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में बच्चों, युवाओं और महिलाओं ने रेला पाटा सहित विभिन्न लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी। मांदर और नगाड़ों की थाप के बीच नगरी का माहौल आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र मीणा ने आदिवासी समाज के अधिकारों और सांस्कृतिक पहचान को लेकर जागरूकता की जरूरत बताई। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के साथ आदिवासी भाषाओं और बोलियों के संरक्षण पर जोर दिया। वहीं आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और एकजुट रहने का संदेश दिया।

जगदलपुर में विशाल रैली, जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संकल्प

बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में मूल निवासी समाज की ओर से विश्व आदिवासी दिवस पर विशाल रैली निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा और लोक संस्कृति की झलक के साथ निकली रैली में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।

रैली के दौरान आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के साथ जल, जंगल और जमीन को बचाने का संकल्प लिया गया। समाज के वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान प्रकृति, संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक जीवन से जुड़ी है, इसलिए इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि बस्तर के जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प लेने का दिन भी है। उन्होंने आदिवासी समाज की परंपराओं और पूजा-अर्चना से जुड़े अधिकारों का भी मुद्दा उठाया।

प्रतापगंजपारा की जमीन पर फिर उठा भूमि अधिकार का मुद्दा

विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर जगदलपुर के प्रतापगंजपारा की विवादित जमीन भी चर्चा में रही। आदिवासी समाज के लोगों ने यहां पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना की और जमीन पर अपने अधिकार का दावा दोहराया।

समाज का कहना है कि इस भूमि का उपयोग आदिवासी समाज की गतिविधियों, सार्वजनिक हित और बस्तर दशहरा जैसे ऐतिहासिक आयोजन के लिए किया जाना चाहिए। समाज की ओर से जमीन के आवंटन को लेकर पहले से न्यायालय में मामला चलने की बात भी कही गई।

सर्व आदिवासी समाज के संभागीय कोषाध्यक्ष पप्पू राम नाग ने बताया कि समाज लंबे समय से इस जमीन की मांग कर रहा है। प्रशासन की अनुमति के बाद विश्व आदिवासी दिवस पर यहां पारंपरिक पूजा-अर्चना की गई।

छुईखदान में बारिश के बीच उमड़ा आदिवासी समाज

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान में केकतीबाड़ी मैदान में जिला स्तरीय आदिवासी-मूल निवासी दिवस का आयोजन किया गया। बारिश के बावजूद जिले के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में समाजजन कार्यक्रम में शामिल हुए।

गोंड, कंवर, कंदरा सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने पारंपरिक वेशभूषा में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, लोककला, भाषा और परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया गया। साथ ही विभिन्न विद्यालयों के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के बाद समाजजनों ने नगर में रैली निकाली। पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ निकली रैली ने सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश दिया।

अंबिकापुर में भी दिखा उत्साह, आदिवासी समाज की एकजुटता पर जोर

अंबिकापुर के कलाकेंद्र मैदान में भी विश्व आदिवासी दिवस पर भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।

अमरजीत भगत ने आदिवासी समाज को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज को विभाजित करने के प्रयासों के बावजूद आदिवासी समाज एकजुट है। कार्यक्रम के दौरान हाल ही में नाबालिग से दुष्कर्म की घटना को लेकर भी समाज में आक्रोश देखने को मिला। समाज के लोगों ने घटना की निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

संस्कृति से अधिकारों तक, एकजुटता का संदेश

छत्तीसगढ़ में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर हुए इन आयोजनों में एक बात समान रही—अपनी संस्कृति, भाषा, परंपरा और पहचान को संरक्षित करने के साथ संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता।

नगरी में रेला पाटा और पारंपरिक लोकनृत्य, जगदलपुर में जल-जंगल-जमीन की आवाज, छुईखदान में सांस्कृतिक विरासत और प्रतिभाओं का सम्मान तथा अंबिकापुर में सामाजिक एकजुटता का संदेश—इन आयोजनों ने प्रदेश में आदिवासी समाज की विविधता और एकता को सामने रखा।

विश्व आदिवासी दिवस के इन आयोजनों में समाज ने अपनी समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और अपने अधिकारों के लिए जागरूक एवं संगठित रहने का संकल्प भी दोहराया।


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