सरकार आर्थिक मंदी के संकेतों को अनदेखा कर रही - पवार
राष्ट्रवादी कांग्रेस कांग्रेस पार्टी (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार ने अर्थव्यवस्था को संभालने के तरीके को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश की असल समस्याओं को नज़रअंदाज़ करते हुए सब कुछ बहुत अच्छा होने की तस्वीर पेश कर रहे हैं।
पवार ने गुरुवार को कहा कि सरकार आर्थिक मंदी के संकेतों को अनदेखा कर रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को उछालकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, "ज़मीनी हकीकत को दरकिनार कर दिया गया है। लोगों को अपनी जेब से ज़्यादा पैसे खर्च करने होंगे और महंगाई की मार झेलनी होगी।"
'कॉकरोच जनता पार्टी' से जुड़े प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ मामले वापस लेने के उच्चतम न्यायालय के हालिया फ़ैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह मामला विद्यार्थियों की जायज़ मांगों से जुड़ा था। उन्होंने दावा किया कि न्यायालय ने साफ़ कर दिया है कि इस मुद्दे से निपटने का सरकार का तरीका सही नहीं था और अधिकारियों को सही फ़ैसले लेने की हिदायत दी है।
शिवसेना के पार्टी नाम और चुनाव चिह्न को लेकर उच्चतम न्यायालय में चल रही सुनवाई के मुद्दे पर पवार ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि कार्यवाही अभी जारी है। उन्होंने कहा, "न्यायालय का फैसला आयेगा। तब तक, इस मामले पर टिप्पणी करना किसी के भी हित में नहीं है।"
उन्होंने मोदी के अक्टूबर में प्रस्तावित बारामती दौरे के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि दौरे के होने की उम्मीद है, हालांकि तारीख अभी तय नहीं हुई है। उन्होंने कहा, "सोलह अक्टूबर को संभावित तारीख के तौर पर देखा जा रहा है।"
पवार के अनुसार, प्रधानमंत्री के बारामती दौरे के दौरान उन्हें एक विस्तृत प्रस्तुति दी जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने पहले सुप्रिया सुले की बेटी की शादी के दौरान मोदी को एक प्रेजेंटेशन दिया था और प्रधानमंत्री अब इस विषय को और विस्तार से समझना चाहते हैं।
चीनी की बढ़ती कीमतों पर टिप्पणी करते हुए पवार ने कहा कि इस बढ़ोतरी का फायदा गन्ना किसानों को उस अनुपात में नहीं मिला है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों को अपनी उपज से मिलने वाली कमाई का उचित हिस्सा मिलना चाहिए, खासकर तब जब उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने चीनी आयात करने के फैसले पर भी सवाल उठाये और कहा कि किसानों और उपभोक्ताओं पर इसके असर का सावधानीपूर्वक आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "चीनी की ऊंची कीमतों का फायदा किसानों तक पहुंचना चाहिए। फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं दिख रही है।"
बारिश की स्थिति पर चिंता जताते हुए पवार ने कहा कि खेती से जुड़ी समस्याओं के अलावा, कई इलाकों में पीने के पानी की भी दिक्कत हो रही है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों और प्रशासन से अपील की कि वे मिलकर इस स्थिति से प्रभावित लोगों की मदद करें।
उन्होंने मिलावट के खिलाफ़ वरिष्ठ अधिकारी तुकाराम मुंडे की कार्रवाई के बाद दूध की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर भी बात की। उन्होंने बताया कि दूध की कीमतें लगभग 60 रुपये से बढ़कर 80 रुपये प्रति लीटर हो गयी हैं।
पवार के मुताबिक, मिलावट के खिलाफ़ सख्ती से दूध की क्वालिटी बेहतर हुई है और इससे उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को फ़ायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता अच्छी गुणवत्ता वाले दूध के लिए ज़्यादा पैसे देने को तैयार हैं और इस बदलाव को उन्होंने सकारात्मक बताया।