चार साल से अंकिता के माता-पिता को नहीं मिला इंसाफ, न्याय की मांग पर मिली हिरासत
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी के माता-पिता और इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस के सभी कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने गुरुवार 15 अक्टूबर को तड़के करीब 4 बजे हिरासत में लिया. और करीब एक घंटे बाद सभी को रिहा कर दिया.
कांग्रेस ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि रिहाई के बाद अंकिता के माता-पिता अपने एक रिश्तेदार के यहां रहने के लिए चले गए हैं. जानकारी के मुताबिक, इंडिया गेट पर रातभर चले धरने के दौरान पुलिस ने गुरुवार तड़के करीब 4 बजे अंकिता भंडारी के माता-पिता समेत प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था. इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेताओं ने पुलिस पर सवाल उठाए. पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की की गई और अंकिता को न्याय दिलाने की मांग कर रहे लोगों को निशाना बनाया गया.
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित रूप से जुड़े एक VIP की भूमिका को लेकर सवाल उठाते रहे पीड़िता के माता-पिता ने दिल्ली में इंडिया गेट पर धरना दिया. पीड़िता परिवार ने भारतीय जनता पार्टी के नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने का विरोध किया है. उनका दावा है कि इस पूरे प्रकरण में जिस 'वीआईपी' की बात सामने आई थी, वह कथित तौर पर गौतम ही हैं. सितंबर, 2022 में अंकिता की हत्या के समय गौतम BJP के उत्तराखंड प्रभारी थे.
वहीँ पुरे मामले नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने कहा कि “चार साल से अंकिता भंडारी के परिवार को इंसाफ नहीं मिला, लेकिन एक ‘VIP’ आरोपी को संरक्षण और संवैधानिक पद का इनाम ज़रूर मिला. जहां बलात्कारियों और हत्यारों का फूल-मालाओं से स्वागत होता है और अपराधियों को सत्ता की ताकत से नवाज़ा जाता है - उस महिला-विरोधी BJP से कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती. आज, अंकिता के माता-पिता अपनी बच्ची के लिए न्याय की गुहार ले कर, अपने घर से मीलों दूर, India Gate पर बैठे हैं. मैं और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं - उनके दुख में भी और इंसाफ की इस लड़ाई में भी” - नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी