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शासकीय आईटीआई में प्रवेश के लिए मांगा डोनेशन, राशि न देने पर एक माह में निकाला, अब तक नहीं हो पाई कार्यवाही.

सरायपाली औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्र दर्राभांठा सरायपाली में फीटर कोर्स के लिए अंतरझोला के एक छात्र ने एडमिशन लिया और लगभग माह भर पढ़ाई करने के बाद उनसे डोनेशन की मांग की गई. राशि जमा नहीं करने के कारण उसको सभी दस्तावेजों को वापस कर संस्था से बाहर निकाल दिया गया. जिसकी शिकायत छात्र के पालक द्वारा कलेक्टर महासमुंद से करते हुए न्याय दिलवाने की मांग की गई थी.

मामले को कलेक्टर ने गंभीरता से लेते हुए पूर्व SDM श्री विनय कुमार लंगेह को जांच के आदेश दिए थे, औऱ जांच अधिकारी के ताबदला होने के कारणों से मामला अब पेंडिंग पड़ा हुआ है.

मिली जानकारी के अनुसार अब इस शिकायत के गवाहों को भी आरोपी सहायक ग्रेड खान द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है, व गवाहो को भी लालच भी दिया जा रहा है. गवाह और सुरक्षा कर्मी यशवंत कुमार यादव ने बताया की सहायक ग्रेड द्वारा अपने आपको बचाने के लिए शिकायत में गवाह के रूप में आईटीआई के सुरक्षाकर्मी यशवंत कुमार यादव और सफाई कर्मी रत्ना बंछोर का मानदेय वेतन विगत लगभग 9 माह से जारी नही किया जा रहा है.

सुरक्षाकर्मी यादव ने सहायक ग्रेड के ऊपर आरोप लगाया है की गवाहो के बयान को बदलने के लिए ऐसा कार्य किया जा रहा है गवाहो का कहना है कि सहायक ग्रेड द्वारा हमारा जानकारी यही रोक दिया जा रहा जिसके कारण 2 कर्मचारी का वेतन लगभग 9 माह से रुका हुआ है.

सुरक्षाकर्मी और सफाई कर्मी ने बताया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है चुकी दोनों कर्मचारी गवाह है और दोनों का वेतन रुक जाएगा तो आर्थिक तंगी से वह अपने आप नौकरी से निकल जाएंगे. गवाह और सुरक्षाकर्मी द्वारा बताया गया कि शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था में पीड़ित छात्र दीपक नंद लगभग 1 माह से अधिक आईटीआई आया था. जिसके गवाह लगभग 38 छात्र है.

छात्रों द्वारा पालक को लिखकर और साइन करके दिया गया है कि पीड़ित छात्र लगभग 1 माह से अधिक आईटीआई आया और पढ़ाई किया है. बताया गया कि अब 38 बच्चो को भी पेट्रिकल में नम्बर बढ़ाने का लालच दिया जा रहा है. सुरक्षाकर्मी ने बताया कि पीड़ित छात्र से लेकर सभी गवाहो को आरोपी द्वारा खरीदने का प्रयास किया जा रहा है.

गौरतलब है कि ग्राम अंतरझोला के दशरथ नंद ने कलेक्टर महासमुंद को लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाते हुए लिखा है कि उनका पुत्र दीपक नंद शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था सरायपाली में अध्ययन हेतु फार्म भरा था. उनके पुत्र का नाम सातवीं सूची में आठवें नंबर पर निकला था.

इसके पश्चात तात्कालीन प्राचार्य लक्ष्मीनारायण पटेल के द्वारा दीपक को काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया और आवश्यक सभी दस्तावेज जमा करने के बाद 1 अगस्त से प्रशिक्षण संस्था में पढ़ने के लिए बुलाया.

1 अगस्त से 30 अगस्त तक दीपक गांव से 20 किमी की दूरी तय कर प्रतिदिन अध्ययन के लिए पहुंचता था और संस्था में भी कक्षा की उपस्थिति पंजी में उनका हाजिरी लिया जा रहा था. इसके अलावा प्रायोगिक कार्य भी करवाया जाता था.

इसी बीच प्राचार्य का स्थानांतरण होने एवं नए प्राचार्य आने के बाद छात्र दीपक नंद को उसका नाम प्रवेश सूची में नहीं होने की बात कहते हुए उसके पिता के साथ कार्यालय बुलाया गया. उसके पिता ने प्राचार्य को बताया कि सभी फीस देने एवं एडमिशन लेने के बाद ही दीपक को अध्ययन के लिए इस संस्था में भेजा गया था. गणवेश, पुस्तक एवं अध्ययन संबंधी समान भी उसने खरीद लिया था.

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