नियम हुए दरकिनार, बीएमओ ने जिले के कई आधाकारियो की जान को डाला खतरे मे !
कोरोना वायरस से निपटने के लिए शासन प्रशासन अलर्ट है, और इसी के तहत कल महासमुंद जिले के सरायपाली में मॉकड्रील भी किया गया. जिससे नगर पुरे जिले में कुछ घंटा के लिए भय का माहौल रहा, लेकिन जब पता चला कि मॉकड्रील है तब लोगो ने राहत की सांस ली.
लेकिन इस मॉकड्रील के चलते अब जिले के कई बड़े अधिकारी और कर्मचारी की जान खतरे में आ गई है. जिसका कारण कोई और नहीं बल्कि सामुदायिक स्वास्थ केंद्र सरायपाली के ब्लाक चिकत्सा अधिकारी है. सरायपाली बीएमओ के ताना तानाशाही रवैया के चलते जिले के कई बड़े अधिकारी सरकारी कर्मचारियों की जान खतरे में हो सकती है.
दरअसल राजस्थान के कोटा से 6 मई को राज्य शासन की पहल पर महासमुंद के रहने वाले विद्यार्थियों को वापस महासमुंद लाया गया था, जहाँ उन्हें होम क्वारंटीन में रहने की जानकारी दी थी. साथ ही सबको एक-एक कर शपथ पत्र भरवाते हुए होम क्वारंटीन में रहने के नियमों से अवगत कराकर हिदायत भी दी गई कि चिन्हांकित संदेहियों एवं उनके साथ होम क्वारंटीन किए जा रहे परिजनों द्वारा 28 दिनों तक नियमावली का पालन करना होगा, नहीं तो तत्काल पुलिस विभाग को सूचित कर उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 188 के तहत वैधानिक कार्यवाही भी की जा सकती है.
इनमें बच्चों के साथ-साथ उन्हें लाने में लगे पुलिस एवं स्वास्थ्यकर्मियों में वाहन चालक तक को रैंडम जांच कर सभी को होम क्वारंटीन में रहने की जानकारी दी गई थी.
जिनमे से एक छात्रा को लेकर आये सरायपाली स्वास्थ्य विभाग के ड्राइवर, सरायपाली से छात्रा को लेने स्वास्थ्य विभाग के ड्राइवर के साथ उसके पिता भी उसे लेने गए थे. जबकि छात्रा की माँ सरायपाली स्वास्थ विभाग में कार्यरत है.
अब नियम के तहत होम क्वॉरेंटाइन इन तीन लोगों को 28 दिनों के लिए किया जाना था, लेकिन सरायपाली बीएमओ ने स्वास्थ्य विभाग के ड्राइवर को होम क्वॉरेंटाइन ख़त्म होने से पहले कार्य पर बुला लिया.
जानकारों की माने तो अगर घर में सभी के लिए होम क्वॉरेंटाइन की सुविधा नहीं है तो पुरे परिवार को होम क्वॉरेंटाइन होना चाहिए लेकिन छात्रा की माँ जो कि सरायपाली स्वास्थ विभाग में कार्यरत वह भी सरायपाली सामुदायिक स्वास्थ केंद्र में नर्स दिवस के दिन बीएमओ के करीब देखि गई.
मामला यहाँ तक सीमित नहीं है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ड्राइवर बिना डिग्री के ईलाज करने वाले एक व्यक्ति के ख़िलाफ ग्राम तोरेसिंहा भी पहुँचा था जहाँ ड्राइवर के अलावा कुछ अन्य कर्मचारियों भी कार्यवाही करने गए थे, लेकिन उन्हें वहां बंदक बना लिया गया. बताया जाता है कि वहां बीएमओ द्वारा कार्यवाही के एवज में पैसे की मांग की जा रही थी जिससे ग्रामीण नाराज थे.
नियमानुसार ड्राइवर और नर्स को भी होम क्वॉरेंटाइन होना था, लेकिन इस नियम को धज्जियां उड़ाते हुए सरायपाली में बीएमओ द्वारा ड्राइवर को खुलेआम ड्यूटी पर आला अधिकारियों के साथ ड्यूटी निभाने दिया. इस बात का पता चलते ही कांग्रेस के जिला महासमुंद के आईटी सेल के प्रभारी जाफ़र उल्ला खान ने बीएमओ सरायपाली के कार्य प्रणाली पर सवाल उठाया हैं, जाफ़र उल्ला खान ने बताया कि सरायपाली में मॉकड्रील के दौरान संबंधित ड्राइवर के साथ-साथ सरायपाली के कई आला अधिकारी, एसडीएम, जिला कलेक्टर घूमते हुए और ड्यूटी निभाते हुए दिखाई दिए है.
वहीँ सवास्थ विभाग के ड्राइवर से पूछे जाने पर कहा कि मैं नियमानुसार होम क्वारेंटिंन में था लेकिन सरायपाली बीएमओ के आदेश पर वापस आ गया.
आपको बता दें कि कोरोना काल के दौरान सरायपाली सहित जिले भर में नियम कायदे कानून को तोड़ने वाले आम व्यक्ति सहित कई सरकारी कर्मचारी पर कार्यवाही हुई है.
वहीं सरायपाली बीएमओ से संपर्क करने पर फोन को डिस्कनेन्स कर दिया गया.
जबकि जिला कलेक्टर श्री सुनील जैन ने कहा कि उन्हें होम क्वारेंटिंन करना था, मामला मेरे संज्ञान में आया है जो भी हुआ है गलत है. नियमानुसार कार्यवाही होगी.