पुणे के एक गांव का फैसला, इलाके में नहीं खरीदे और बेचे जाएंगे चीनी सामान, जारी किया पर्चा
महाराष्ट्र के पुणे जिले की कोंधवे-धावडे ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पास कर एक जुलाई से गांव में चीनी सामान की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है। ग्राम पंचायत ने इस संबंध में एक पर्चा (सर्कुलर) जारी किया है, जिसे दुकानदारों और ग्रामीणों के बीच बांटा जा रहा है। इसमें कहा गया है कि गांव का कोई भी दुकानदार चीनी सामान नहीं रखेगा। इसके साथ ही गांव का कोई भी व्यक्ति चीनी सामान नहीं खरीदेगा। कोंधवे-धावडे गांव के सरपंच नितिन धावडे ने कहा कि यह फैसला मासिक बैठक के दौरान लिया गया।
सरपंच ने बताया कि हम ग्राम पंचायत के ठेकेदारों को भी इस निर्णय के बारे में बता रहे हैं। उनके साथ अनुबंध के दौरान भी चीनी उत्पादन का इस्तेमाल नहीं किए जाने की शर्त रखेंगे। हम दुकानदारों और ग्रामीणों को भी चीनी उत्पादों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए कह रहे हैं। इसके लिए हम पोस्टर-बैनर भी लगाएंगे। उल्लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन की कायराना हरकतों को लेकर देशभर में गुस्सा देखा जा रहा है। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने चीन की तीन कंपनियों के साथ हुए करीब 5,000 करोड़ रुपये के करार को होल्ड पर रखने की घोषणा की थी।
बीते दिनों संघ ने भी एक महत्वपूर्ण बैठक कर देश में चीन निर्मित सामानों के बहिष्कार के लिए चलाए जाने वाले अभियान का नेतृत्व करने का फैसला किया था। इससे पहले कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी कैट ने चीनी वस्तुओं के बहिष्कार अभियान में मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों का समर्थन मांगा था। यही नहीं कैट के 'भारतीय सामान-हमारा अभिमान' के आह्वान पर क्रिकेटर हरभजन सिंह ने किसी भी चीनी ब्रांड का विज्ञापन न करने की घोषणा की थी। सरकार भी चीन से आयात होने वाले कुछ स्टील उत्पादों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा चुकी है।